Strait of Hormuz Internet Threat : ईरान-अमेरिका इजराईल युद्ध के बीच दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz इस समय बड़े भू-राजनीतिक संकट के केंद्र में है. दोनों तरफ से जारी हमलों के बीच इस इलाके में तनाव है. इस रास्ते पर तेल समेत जरुरी सामानों से भरे हजारों कार्गो शिप फंसे हुए हैं. ऐसे में अगर इस जगह पर कोई अटैक होता है और अंडरसी केबल को निशाना बनाया जाता है तो पूरी दुनिया में इंटरनेट ब्लैकआउट हो सकता है.
Strait of Hormuz Internet Threat : समुद्र के अंदर बिछे केबल से जुड़ा है इंटरनेट वर्ल्ड
दुनिया की डिजिटल कनेक्टिविटी काफी हद तक समुद्र के नीचे बिछे अंडरसी इंटरनेट केबल्स पर निर्भर करती है.आज दुनिया में 400 से ज्यादा बड़े सबमरीन केबल नेटवर्क मौजूद हैं,जो अलग-अलग महाद्वीपों को आपस में जोड़ते हैं और लाइट की स्पीड के करीब डेटा ट्रांसफर करते हैं. ये केबल समुद्र की सतह से कई किलोमीटर नीचे बिछे होते हैं और वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 95 प्रतिशत इन्हीं के जरिए गुजरता है.
मिडिल ईस्ट और एशिया को यूरोप से जोड़ने वाले कई अहम केबल नेटवर्क पर्शियन गल्फ और उसके आसपास के समुद्री इलाकों से होकर गुजरते हैं. इनमें Gulf Bridge International, FALCON Submarine Cable System, Europe India Gateway और I‑ME‑WE Submarine Cable System जैसे बड़े नेटवर्क शामिल हैं. ये केबल एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी का मुख्य आधार हैं.
इन्हीं समुद्री रास्तों के ऊपर से दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz गुजरता है। यही कारण है कि अब इसे सिर्फ ऊर्जा सप्लाई का ही नहीं बल्कि वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी एक बड़ा “डिजिटल चोकपॉइंट” माना जा रहा है.
क्या भारत में हो सकता है इंटरनेट ब्लैकआउट?
दुनिया के कई प्रमुख टेलीकॉम नेटवर्क के लिए होर्मुज क्षेत्र एक अहम मार्ग है. हालांकि Bharti Airtel जैसी भारतीय टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि उनके कई प्रमुख केबल सीधे इस मार्ग से ऑपरेट नहीं होते हैं.भारत का अधिकतर इंटरनेशनल डेटा ट्रैफिक Red Sea और Gulf of Aden के रास्ते आगे बढ़ता है.
फिर भी टेक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाले कई डेटा रूट मिडिल ईस्ट क्षेत्र से होकर गुजरते हैं. भारत के पश्चिम दिशा में जाने वाले इंटरनेट ट्रैफिक का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर जाता है.
अगर किसी कारण से इस इलाके में समुद्री गतिविधियां रुकती हैं,केबल वायर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या डेटा रूट ब्लॉक हो जाते हैं, तो भारत में इंटरनेट स्पीड और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इसी वजह से भारत में पूरी तरह इंटरनेट ब्लैकआउट होने की संभावना बहुत कम है.
पहले भी पड़ चुका है असर
हाल ही में Red Sea क्षेत्र में अंडरसी केबल कटने की घटना सामने आई थी. उस दौरान एशिया और मिडिल ईस्ट के कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई थीं और क्लाउड सेवाओं की स्पीड भी धीमी हो गई थी. बड़ी टेक कंपनियों को डेटा ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से रीरूट करना पड़ा, जिससे नेटवर्क लेटेंसी बढ़ गई थी.
टेक कंपनियों के लिए बढ़ता खतरा
पिछले कुछ सालों में मिडिल ईस्ट में बड़ी टेक कंपनियों ने भारी निवेश किया है. Amazon, Google और Microsoft जैसी कंपनियां ने यहां के देशों में बड़े डेटा सेंटर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किये हैं लेकिन इन डेटा सेंटर्स को दुनिया से जोड़ने वाले कई इंटरनेट केबल इसी क्षेत्र से गुजरते हैं.
क्यों कहा जाता है डिजिटल चोकपॉइंट
विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबल बेहद संवेदनशील होते हैं. कई बार जहाजों के एंकर, समुद्री गतिविधियों या भू-राजनीतिक तनाव के कारण भी इन केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है.
अगर किसी रणनीतिक समुद्री रास्ते में केबल कट जाते हैं, तो डेटा ट्रैफिक को दूसरे रूट पर भेजना पड़ता है. इससे नेटवर्क की स्पीड कम हो सकती है और कई ऑनलाइन सेवाएं धीमी पड़ सकती हैं. ऐसे में Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा अब वैश्विक डिजिटल इकोनॉमी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

