Friday, February 27, 2026

Uttarakhand Earthquake: उत्तराखंड में कभी भी आ सकता है “ग्रेट अर्थक्वेक”, तुर्की से ज्यादा तीव्रता से हिलेगी धरती

हिमालय में हलचल हो रही है. हिमालय के अंदर कुछ बदल रहा है. उत्तराखंड मुसीबत में है. जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद अब उत्तराखंड के पहाड़ों पर भूकंप का खतरा मंडरा रहा है. भूकंप भी कोई ऐसा वैसा नहीं. रिक्टर स्केल पर 8 से ज्यादा तीव्रता वाला.

उत्तराखंड में कभी भी आ सकता है रिक्टर स्केल पर 8 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप

उत्तराखंड एक बार फिर सुर्खियों में है. उत्तराखंड में कुछ ठीक नहीं चल रहा है. एक बड़ी आपदा उत्तराखंड के सामने मुंह फाड़े खड़ी है. तुर्की में आए शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता वाला भूकंप उत्तराखंड (Uttarakhand Earthquake) क्षेत्र में कभी भी आ सकता है. राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) में मुख्य भूकंप वैज्ञानिक, डॉ एन पूर्णचंद्र राव ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड की ज़मीन के नीचे काफी तनाव पैदा हो रहा है, जिसकी वजह से यहां एक बड़ा भूकंप कभी भी आ सकता है. हैदराबाद राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उत्तराखंड क्षेत्र में सतह के नीचे बहुत तनाव पैदा हो रहा है. और इस तनाव को  रिलीज करने के लिए उस इलाके में एक भूकंप (Uttarakhand Earthquake) का आना अनिवार्य यानी (MANDATORY)  हो जाता है. हालांकि, डॉ एन पूर्णचंद्र राव ने ये साफ कहा कि भूकंप की तारीख और समय की भविष्यवाणी वो नहीं कर सकते हैं.

जीपीएस पॉइंट हिल रहे हैं, जो सतह के नीचे होने वाले हलचल का संकेत दे रहे हैं

डॉ एन पूर्णचंद्र राव ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए बताया कि “हमने उत्तराखंड पर केंद्रित हिमालयी क्षेत्र में भूकंप का पता लगाने वाले लगभग 80 स्टेशन बनाए हैं. हम रीयल टाइम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. हमारा डेटा दिखाता है कि तनाव काफी समय से नीचे जमा हो रहा है. हमारे पास के क्षेत्र में जीपीएस नेटवर्क है. ध्यान से देखने पर जीपीएस पॉइंट हिल रहे हैं, जो सतह के नीचे होने वाले हलचल का संकेत दे रहे हैं.” डॉ. राव ने कहा कि पृथ्वी के साथ क्या हो रहा है, यह तय करने के लिए वेरियोमेट्रिक जीपीएस डाटा प्रोसेसिंग विश्वसनीय तरीकों में से एक है. राव ने जोर देकर कहा, “हम सटीक समय और तारीख की भविष्यवाणी तो नहीं कर सकते  लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand Earthquake) में कभी भी भारी भूकंप आ सकता है.” बता दें कि वेरियोमीटर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में आने वाले वेरियएशन को मापते हैं.

“ग्रेट अर्थक्वेक” से कैसे बचेगा उत्तराखंड?

देश के जाने माने भू वैज्ञानिक कह रहे हैं कि जोरदार भूकंप आने वाला है. तो अब बात भूकंप से होने वाले नुकसान की कर लेते हैं.  डॉ. राव का कहना है कि रिक्टर पर 8 और उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों को ही “ग्रेट अर्थक्वेक” कहा जाता है. जो तुर्की में आया वो 7.8 तीव्रता वाला भूकंप था. इसलिए “तकनीकी रूप से उसे एक बड़ा भूकंप नहीं कहा जा सकता है, लेकिन खराब गुणवत्ता वाले निर्माण सहित कई वजहों से तर्की में तबाही अधिक हुई.” आपको बता दें तुर्की और सीरिया में छह फरवरी को आए भूकंप में कई शहर तबाह हो गए हैं. आपदा के बाद से अब तक वहां मलबे से 40 हजार से ज्यादा लोगों के शवों को निकाला जा चुका है.

ऐसे में डॉ. राव का ये कहना कि हिमालय में तुर्की जैसा 7.8 नहीं बल्कि उससे भी ज्यादा मतलब 8 से ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप (Uttarakhand Earthquake) आने की संभावना है जो दिल को दहला देता है. डॉ राव के मुताबिक भूकंप जिस क्षेत्र में आने की संभावना है वो क्षेत्र जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ है. उन्होंने कहा, “नुकसान जनसंख्या घनत्व, इमारतों, पहाड़ों या मैदानों पर हुए निर्माण की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. हमारा मानना है कि तीव्रता के मामले में भूकंप तुर्की जैसा या उससे अधिक का ही होगा.”

बद्रीनाथ हाईवे पर पड़ी नई दरारें

वैज्ञानिक ये साफ कह रहे हैं कि भूकंप आएगा और सरकार दावा कर रही है कि चार धाम यात्रा होगी. उत्तराखंड (Uttarakhand Earthquake) में दो महीने बाद चार धाम यात्रा शुरु हो जाएगी. पिछले हफ्ते केदारनाथ धाम के कपाट खुलने और यात्रा को लेकर एलान के बाद अब बदरीनाथ हाईवे के पास सड़कों पर दरारें आ गई हैं. जोशीमठ के पास बद्रीनाथ हाईवे से लगने वाली सड़कों पर दरारें पाई गई हैं. यह दरारें जेपी और मारवाड़ी के पास पाई गई. चमोली के डीएम हिमांशु खुराना ने कहा कि बद्रीनाथ हाईवे पर जेपी से मारवाड़ी तक सड़क में दरारें आ गई हैं. खुराना ने कहा, “सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को दरारों की जांच करने और जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं.”

सड़क के साथ-साथ जोशीमठ के सैकड़ों घरों में भी दरारें पड़ने की शिकायत आई है. कर्ण प्रयाग और चमोली में पहले ही घरों में दरारें पड़ने के मामले सामने आ चुके हैं.

शिवरात्री पर की गई चार धाम यात्रा की घोषणा

इसके बावजूद शिवरात्री पर चार धाम यात्रा का एलान भी कर दिया गया है. आपको बता दें कि बदरीनाथ धाम चार प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है जिसे ‘चार धाम’ कहा जाता है जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ भी शामिल हैं. इनके कपाट हर साल छह महीने (अप्रैल के अंत और नवंबर की शुरुआत तक) खुले रहते हैं. हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर ही यह ऐलान किया जाता है कि केदारनाथ धाम के कपाट कब खुलेंगे. इस बार केदारनाथ मंदिर समिति ने ऐलान किया कि इस बार 25 अप्रैल को कपाट खुलेंगे और 14 नवंबर तक बंद कर दिए जाएंगे. देशभर के सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन को पहुंचते हैं. ऐसे में भूकंप के खतरे और सड़क पर पड़ रही दरारों के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है. हलांकि प्रशासन ऐसे बड़े खतरे को लेकर अंजान बना हुआ है.

बद्रीनाथ हाईवे पर जोशीमठ-मारवाड़ी के बीच सड़क में आई नई दरारों को लेकर चमोली के मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्रा का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेज दिया है. उनके मुताबिक ये सड़क सभी गाड़ियों के लिए उपयुक्त है. चार धाम यात्रा की तैयारियों के लिए सड़कों की स्थिति को ठीक कर रहे हैं. इससे पहले तुर्की में भूकंप की भविष्यवाणी करने वाले वैज्ञानिक फ्रैंक हूगरबीट्स ने भी एशिया में तुर्की जैसे बड़े भूकंप को लेकर भविष्यवाणी की है. हलांकि राहत की बात ये है कि फ्रैंक हूगरबीट्स ने भारत में बड़े भूकंप (Uttarakhand Earthquake) की आशंका तो जताई है लेकिन साथ ही कहा है कि इस भूकंप का प्रमुख केंद्र अफगानिस्तान होगा. इसकी चपेट में भारत और पाकिस्तान आ सकते हैं.

आपदा की भविष्यवाणियों के बीच सरकार लाखों श्रद्धालुओं को बुला रही है उत्तराखंड

यानी ग्रह नक्षत्रों की गणना करने वालों से लेकर पृथ्वी के अंदर तक की जानकारी जुटाने वाले वैज्ञानिक बहुत जल्द इस क्षेत्र में बड़े भूकंप आने की बात कर रहे हैं. जोशीमठ, समेत उत्तराखंड के कई इलाकों में ज़मीन में दरार पड़ रही है. कश्मीर के डोडा में भी दरारें पड़ने की खबर है. पहाड़ों की रानी कहे जाने वाली मसूरी भी दरारों की चपेट में है. लेकिन इन सब जानकारियों और भविष्यवाणियों के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार अंजान बनी हुई है. उत्तराखंड सरकार चार धाम यात्रा की तैयारियों में व्यस्त है तो केंद्र जाने किस बात का इंतजार कर रहा है. जोशीमठ तो धंस ही रहा है कहीं ऐसा न हो वक्त रहते कदम नहीं उठाने का नतीजा 2013 में आई केदारनाथ आपदा जैसा हो. पहले ही पहाड़ों में निर्माण के चलते विध्वंस की आशंका जताई जा रही है उसपर चार धाम यात्रा का एलान कर देशभर से लाखों यात्रियों को उत्तराखंड आने का न्योता देना कहां कि समझदारी है. भले ही भूकंप (Uttarakhand Earthquake) आने के दिन तारीख की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती हो लेकिन जो आशंका जताई जा रही है उसको लेकर पहाड़ों में हुए निर्माण की गुणवत्ता की तो जांच की जा सकती है और कमज़ोर पाए जाने वाले निर्माणों से लोगों को निकाला जा सकता है ताकी जब धरती अपने अंदर पैदा हो रहे तनाव को रिलीज करें तो हम तैयार हों उसकी शक्ति का मुकाबला करने के लिए.

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