नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन NSUI के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में समीक्षाओं का दौर शुरू हो गया है। चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन केंद्रीय पदों पर शानदार जीत दर्ज की है, जबकि NSUI के हाथ एक भी सीट नहीं लगी। इस हार के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक कमजोरियों और रणनीतिक चूकों पर मंथन तेज हो गया है।
राहुल गांधी और कन्हैया कुमार के बीच हुई बैठक
सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता कन्हैया कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में DUSU चुनाव में NSUI के प्रदर्शन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। राहुल गांधी ने चुनाव में हार के मुख्य कारणों, परिसरों (कैंपस) में युवाओं के बीच संगठन की जमीनी पकड़ और चुनावी रणनीतियों को लेकर जानकारी ली। चर्चा के दौरान संगठन के भीतर समन्वय और उम्मीदवारों के चयन से जुड़े पहलुओं पर भी बात किए जाने की खबरें सामने आई हैं, हालांकि पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
चुनावी नतीजे: ABVP का दबदबा और NSUI की हार
इस बार के डूसू चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर ABVP ने कब्जा जमाया:
प्रेसिडेंट पद: ABVP के यश डबास ने 24,576 वोट पाकर जीत हासिल की। उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया, जिन्हें 22,523 वोट मिले। इस कड़े मुकाबले में हार के बाद NSUI उम्मीदवार ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
वाइस प्रेसिडेंट पद: यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। NSUI से टिकट न मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने ABVP के ईशु मौर्य को मात दी।
सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पद: सेक्रेटरी पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने जीत दर्ज की, जबकि ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर भी ABVP के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे।
संगठन के स्तर पर आत्ममंथन की जरूरत
चुनाव परिणामों के तुरंत बाद NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संगठनात्मक कमियों की समीक्षा करने की बात कही थी। बहरहाल, डूसू चुनावों के इन नतीजों ने कांग्रेस के छात्र संगठन के सामने कैंपस राजनीति में अपनी जमीन को मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

