वांगचुक के आंदोलन पर सियासत तेज, संजय राउत ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन लंबे अनशन को समाप्त करने के तरीके पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक का उपवास जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों और आम जनता की उपस्थिति में खत्म होना चाहिए था। उन्होंने आंदोलन की समाप्ति पर खुशी तो जताई, लेकिन अनशन तुड़वाने के दौरान दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी को लेकर सरकार की मंशा पर संदेह जताया है।

केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी पर उठाए सवाल

संजय राउत ने कहा कि जिस सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ 26 दिनों तक यह देशव्यापी आंदोलन चला, उसी सरकार के दो मंत्रियों की उपस्थिति में अनशन का समाप्त होना कई गंभीर सवाल पैदा करता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सोनम वांगचुक को दिए गए सभी आश्वासनों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राउत ने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रमुख मांग पूरी ही नहीं हुई, तो आखिर इतनी जल्दी अनशन खत्म करने की क्या वजह थी?

शिक्षा मंत्री को बचाने का आरोप और मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान

शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने केंद्र सरकार पर शिक्षा मंत्री को बचाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनशन खत्म करने के लिए अस्पताल के बजाय जंतर-मंतर पर घायल छात्रों या साथी आंदोलनकारियों के हाथों जूस पीना अधिक उपयुक्त होता, जिससे आंदोलन की गरिमा बनी रहती। इसके साथ ही राउत ने घोषणा की कि मुंबई में इस मुद्दे को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में 'राष्ट्रगान आंदोलन' और रविवार को उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे की अगुआई में एक विशाल मार्च निकाला जाएगा।

सोनम वांगचुक के त्याग की सराहना और सरकार पर हमला

राउत ने कहा कि 26 दिनों तक युवाओं और शिक्षा प्रणाली की रक्षा के लिए भूखे रहना एक महान त्याग है और इसके लिए सोनम वांगचुक पूरे सम्मान के पात्र हैं। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जंतर-मंतर के आंदोलन को कुचलने और वांगचुक के साथ अमानवीय व्यवहार करने का प्रयास किया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने भाजपा सरकार पर दल-बदल विरोधी कानून की धज्जियां उड़ाने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का भी गंभीर आरोप लगाया।

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