महिला वकीलों के बार रूम के लिए फंड जारी करने की मांग, 14 राज्यों में जजों की रिटायरमेंट एज 62 करने पर सहमति

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर की जिला और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए पृथक बार रूम, वॉशरूम तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक फंड आवंटित करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने महिला अधिवक्ताओं के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने अदालती परिसरों में महिला वकीलों के लिए सुविधाओं के अभाव पर तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वकीलों की संख्या चाहे जो भी हो, उन्हें बुनियादी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो दिसंबर की तिथि निर्धारित की है।

जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और सेवानिवृत्त जजों की अर्जियों पर रुख

शीर्ष अदालत ने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि देश के 14 राज्य जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर सहमत हो गए हैं। पीठ ने उम्मीद जताई कि शेष राज्य भी जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएंगे। इसके साथ ही न्यायालय ने हाल ही में सेवानिवृत्त हुए या सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे न्यायिक अधिकारियों की अलग-अलग याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की पदोन्नति की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न उच्च न्यायालयों के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की महत्वपूर्ण सिफारिश की गई है। कॉलेजियम ने तेलंगाना हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस पी. सैम कोशी को दिल्ली हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है। इसके अतिरिक्त गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस मानस रंजन पाठक को उसी हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनाने, कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती को तेलंगाना हाईकोर्ट तथा पटना हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर सिंह को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

126 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में रियल एस्टेट प्रमोटर की जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस

घर खरीदारों से जुटाए गए 126 करोड़ रुपये के कोष में हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की रियल एस्टेट कंपनी 'उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स' के मुख्य प्रमोटर अनिल मिठास की जमानत अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब तलब किया है। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें मिठास की जमानत खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कॉरपोरेट धोखाधड़ी और गबन जैसे गंभीर आर्थिक अपराध आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई को तबाह कर देते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में राहत नहीं दी जा सकती।

डिजिटल डेटा संरक्षण कानून के खिलाफ समाचार प्रकाशकों की याचिका पर सुनवाई आज

देश के प्रमुख डिजिटल समाचार प्रकाशकों के संगठन ने केंद्र सरकार के नए 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून' की वैधानिकता को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे विकसित क्षेत्रों के डेटा गोपनीयता कानूनों में पत्रकारिता को स्पष्ट छूट दी गई है, जबकि भारतीय कानून में मीडिया को ऐसी कोई राहत नहीं मिली है। प्रकाशकों ने ऐतराज जताया है कि आरोपी से लिखित सहमति लेने की अनिवार्यता से निष्पक्ष खोजी पत्रकारिता समाप्त हो जाएगी तथा प्रशासनिक शक्तियों के बल पर पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की गोपनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी।

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