राष्ट्रपति ट्रंप को लग सकता है बड़ा झटका, परिवार की भी बढ़ सकती हैं परेशानियां

वाशिंगटन। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, जिससे देश के भावी राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इस ऐतिहासिक जनादेश के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो वर्षों के कार्यकाल में अपनी नीतियों को लागू करना और नए विधेयक पारित कराना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक अब ट्रंप को एक कमजोर राष्ट्रपति के रूप में आंक रहे हैं, क्योंकि दोनों सदनों से बहुमत गंवाने की ऐसी स्थिति इससे पहले केवल 2006, 1994 और 1954 में ही निर्मित हुई थी।

ईरान युद्ध, महंगाई और पेट्रोलियम कीमतों ने बिगाड़ा खेल

डेमोक्रेट्स की इस बड़ी जीत को ट्रंप प्रशासन के फैसलों के प्रति आम जनता की गहरी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी इस चुनावी हार के पीछे ईरान के साथ जारी युद्ध, पेट्रोल की बेकाबू कीमतों और कई रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लचर प्रदर्शन को मुख्य वजह बताया है। उन्होंने माना कि कई प्रत्याशी आम मतदाताओं में जरूरी उत्साह पैदा करने में विफल रहे। दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी के अपने अंदर भी राष्ट्रपति की कार्यशैली, आसमान छूती महंगाई और उनकी घटती साख को लेकर असंतोष के स्वर मुखर हो रहे हैं। यहां तक कि टेक्सास जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ में भी डेमोक्रेट्स ने विजय दर्ज कर सभी को चौंका दिया है।

भारतीय मूल के मतदाताओं में घटी लोकप्रियता

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच भी ट्रंप का जनाधार काफी खिसका है। व्यापारिक शुल्कों में वृद्धि, रूस से तेल आयात पर अमेरिकी रुख और एच-1बी वीजा नियमों में लगातार की गई सख्ती जैसी नीतियों को भारतीय प्रवासियों के इस मोहभंग का मुख्य कारण माना जा रहा है।

ट्रंप के कारोबारी सौदों की शुरू होगी कड़ी संसदीय जांच

दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा होने के बाद अब ट्रंप सरकार के पिछले फैसलों और नीतियों की व्यापक संसदीय जांच की राह साफ हो गई है। प्रतिनिधि सभा की विभिन्न शक्तिशाली समितियां अब राष्ट्रपति के परिवार से जुड़े कारोबारी सौदों, क्रिप्टोकरेंसी में किए गए निवेशों और संभावित हितों के टकराव से संबंधित मामलों की गहन पड़ताल शुरू कर सकती हैं। इसके अलावा प्रतिनिधि सभा के पास राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का भी अधिकार होगा, यद्यपि उन्हें पदमुक्त करने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता पड़ेगी।

एलन मस्क की भूमिका पर छिड़ी नई बहस

इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में ट्रंप के करीबी उद्योगपति एलन मस्क की राजनीतिक संलिप्तता और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को दिए गए भारी-भरकम आर्थिक सहयोग पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। इस हार के बाद अब अमेरिकी सत्ता के गलियारों में राजनीतिक जवाबदेही, बड़े व्यापारिक हितों के प्रभाव और शासकीय शक्तियों के न्यायसंगत इस्तेमाल को लेकर एक नया दौर शुरू होने की संभावना है।

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