पांच साल तक वेतन पर्चियों में करता रहा हेरफेर, 1.18 करोड़ का घोटाला उजागर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पुलिस विभाग की चौथी वाहिनी से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज वित्तीय घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। वाहिनी की वेतन शाखा में पदस्थ रहे एक आरक्षक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने से लगभग एक करोड़ अठारह लाख रुपये का भारी-भरकम गबन कर डाला। माना थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी आरक्षक कमलेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने इस पूरी भारी-भरकम राशि को अपनी मां के बैंक खाते में किस्तों के माध्यम से स्थानांतरित किया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर वित्तीय अनियमितता की गहराई से छानबीन शुरू कर दी है।

पांच वर्षों तक लंबी अवधि तक चलता रहा फर्जीवाड़े का खेल

पुलिस की प्रारंभिक विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि यह पूरा वित्तीय फर्जीवाड़ा एक नवंबर 2012 से एक अप्रैल 2017 के बीच लंबी अवधि तक अंजाम दिया गया। इस समयावधि के दौरान आरक्षक कमलेश कुमार साहू चौथी बटालियन की वेतन शाखा में अपनी सेवाएं दे रहा था। उसने विभागीय व्यवस्थाओं और अपनी तैनाती का फायदा उठाते हुए पांच साल के अंतराल में थोड़ा-थोड़ा करके कुल एक करोड़ अठारह लाख रुपये सरकारी खाते से निकालकर अपनी माता के बैंक खाते में अवैध रूप से जमा करा दिए। आरोपी ने एकमुश्त बड़ी रकम भेजने की बजाय सुनियोजित तरीके से किस्तों में पैसे ट्रांसफर किए, ताकि लंबे समय तक इस गंभीर हेरफेर की भनक किसी भी उच्च अधिकारी या अन्य कर्मचारियों को न लग सके।

घोटाले का खुलासा और विभागीय हलकों में मचा हड़कंप

जब आंतरिक स्तर पर इस भारी गबन की बात सामने आई, तो तुरंत इसकी लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों को सौंपी गई। शिकायत मिलते ही माना थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज किया और आरोपी आरक्षक को धर दबोचा। जगदलपुर के पश्चात अब राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे के भीतर से जुड़ा इस स्तर का बड़ा वेतन घोटाला सामने आने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि गबन की गई पूरी राशि और उसके उपयोग की सही जानकारी जुटाई जा सके।

अन्य कर्मचारियों और दस्तावेजों की भूमिका जांच के दायरे में

माना थाना पुलिस अब इस तकनीकी पहलू की भी बारीकी से जांच कर रही है कि वेतन शाखा की सुरक्षित और आधिकारिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर इतनी बड़ी धनराशि को अन्य खातों में किस प्रकार ट्रांसफर किया गया। जांच अधिकारी इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि इस वित्तीय गड़बड़ी को अंजाम देने में किन-किन दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया गया था। इसके साथ ही, पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस पूरे प्रकरण में वेतन शाखा में कार्यरत अन्य लोगों की संलिप्तता थी या नहीं। पुलिस का स्पष्ट मानना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी अन्य दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध भी अत्यंत कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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