ट्रंप की सलाह पर नाटो का पलटवार, बैठक में हुआ तीखा जवाब

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान उम्मीद के मुताबिक पूरा साथ न मिलने पर अपने ही नाटो (NATO) सहयोगी देशों के प्रति गहरी नाराजगी जताई है। व्हाइट हाउस में नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि भले ही अमेरिका को ईरान के खिलाफ किसी की सीधी मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन वह अपने साथियों से कम से कम वफादारी और नैतिक समर्थन की उम्मीद तो कर ही रहा था। ट्रंप ने तल्ख अंदाज में कहा, "हमने ईरान को पहले ही हफ्ते में पूरी तरह तबाह कर दिया था। हमें किसी की मदद नहीं चाहिए थी, लेकिन अगर हमारे सहयोगी देश संकट के समय यह कहते कि 'हम आपके साथ हैं', तो अच्छा लगता।" जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ दिया, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, "नहीं।"

नाटो प्रमुख ने किया बचाव, विमानों की उड़ानों का दिया हवाला

डोनाल्ड ट्रंप के इन तीखे आरोपों के बाद नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यूरोपीय देशों का खुलकर बचाव किया। उन्होंने ट्रंप के सामने ही स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ छह हफ्तों तक चले लंबे सैन्य अभियान के दौरान यूरोप ने अमेरिका का पूरा साथ दिया था। रुटे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस जंग के दौरान यूरोप के अलग-अलग सैन्य ठिकानों से अमेरिका के करीब 4,000 से 5,000 लड़ाकू विमानों ने लगातार उड़ानें भरी थीं। उन्होंने उदाहरण दिया कि रोमानिया के बुखारेस्ट हवाई अड्डे को तो आम जनता के लिए कुछ समय तक बंद रखना पड़ा था, ताकि अमेरिकी सैन्य विमान वहां से बिना किसी रुकावट के उड़ान भर सकें। रुटे ने कहा कि एकाध घटनाओं को छोड़कर पूरा यूरोप अमेरिका के साथ मुस्तैदी से खड़ा रहा।

यूरोपीय देशों को ट्रंप की दोटूक- 'मुफ्त की सवारी' नहीं चलेगी

इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोप के कई बड़े देशों का नाम लेकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, "स्पेन का रवैया पूरी तरह निराशाजनक रहा। मैं इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से भी बेहद निराश हूं। ज्यादातर देश रक्षा के नाम पर कुछ भी खर्च करना नहीं चाहते। उन्हें लगता है कि अमेरिका हमेशा उनकी रक्षा करता रहेगा और उन्हें मुफ्त की सवारी (फ्री राइड) मिलती रहेगी।" ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिका के हजारों सैनिक यूरोप की सुरक्षा में तैनात हैं, जिसमें अकेले जर्मनी में ही करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका को सहयोगियों के पैसे की नहीं बल्कि उनकी वफादारी की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, हमें सिर्फ वफादारी चाहिए। हम हमेशा उनके लिए लड़ते हैं, लेकिन बदले में थोड़ा समर्थन भी नहीं मिलता।"

दबाव के बाद यूरोप ने बढ़ाया रक्षा बजट

तनावपूर्ण बहस के बीच नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यह भी दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बनाए गए दबाव का ही असर है कि यूरोप और कनाडा ने अपने रक्षा खर्च में करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को भी अरबों डॉलर के नए हथियारों के ऑर्डर दिए गए हैं। रुटे के मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि सहयोगी देशों ने रक्षा के क्षेत्र में अपना बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बहरहाल, व्हाइट हाउस की इस बैठक ने अमेरिकी विदेश नीति और नाटो देशों के आपसी रिश्तों में चल रही खींचतान को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।

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