हेलसिंकी। फिनलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बनने जा रहा है, जहां उपयोग किए जा चुके परमाणु ईंधन को स्थायी रूप से जमीन के नीचे सुरक्षित रूप से संरक्षित करने की व्यवस्था की गई है। देश के ‘ओनकालो’ केंद्र को हाल ही में संचालन का लाइसेंस मिलने के बाद इस अनोखी परियोजना को ऐतिहासिक सफलता मिली है। हालांकि, परमाणु कचरे के दीर्घकालिक भंडारण को लेकर सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। विभिन्न परीक्षणों और कड़े तकनीकी मानकों की जांच के बाद इस केंद्र को संचालन की आधिकारिक अनुमति दी गई है।
क्या है ओनकालो परियोजना और इसकी क्षमता?
दुनिया के अधिकांश देशों में इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के लिए अब तक कोई स्थायी भंडारण प्रणाली विकसित नहीं हो पाई है, और इसे आमतौर पर अस्थायी केंद्रों में ही रखा जाता है। फिनलैंड में ओनकालो परियोजना पर काम लगभग 22 साल पहले शुरू हुआ था। इस अत्याधुनिक केंद्र में देश के पांचों परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले खर्च किए गए ईंधन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी, जिसकी कुल भंडारण क्षमता करीब 6,500 टन यूरेनियम है।
कचरे को सुरक्षित रखने की बहुस्तरीय तकनीक
परमाणु कचरे को हजारों वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद मजबूत बहुस्तरीय प्रणाली तैयार की गई है:
तांबे के विशेष कंटेनर: सबसे पहले इस्तेमाल हो चुके ईंधन को जंग और क्षरणरोधी विशेष तांबे के कंटेनरों में पैक किया जाएगा।
चट्टानों के नीचे गहरा भंडारण: इन कंटेनरों को जमीन के भीतर अत्यधिक गहराई में स्थित कठोर चट्टानों के अंदर बनाए गए कक्षों में सुरक्षित रखा जाएगा।
विशेष मिट्टी की परत: कंटेनरों के आसपास सुरक्षा के लिहाज से विशेष प्रकार की मिट्टी भरी जाएगी और पूरी संरचना को इस तरह सील किया जाएगा कि रेडियोधर्मी पदार्थ किसी भी स्थिति में बाहर न आ सकें।
हजारों वर्षों की सुरक्षा और वैश्विक चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि समय बीतने के साथ परमाणु ईंधन की रेडियोधर्मिता धीरे-धीरे कम होती जाती है, लेकिन इसके पूरी तरह सुरक्षित स्तर तक आने में लंबा समय लगता है। इसलिए इस पूरी प्रणाली को आगामी हजारों वर्षों तक सुरक्षित बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। परमाणु संयंत्रों को बंद करने, पुराने उपकरणों को हटाने और रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित प्रबंधन करने में भारी लागत आती है, जिसके लिए उन्नत तकनीक और मजबूत निगरानी की आवश्यकता होती है। वर्ष 1986 की चेरनोबिल दुर्घटना परमाणु सुरक्षा के इतिहास की एक बड़ी चेतावनी है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और रूस जैसे देशों में कई रिएक्टर बंद किए जा चुके हैं, जिसके बाद सुरक्षित कचरा निपटान वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चिंता बना हुआ है। ऐसे में फिनलैंड का ओनकालो केंद्र इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।

