हेलसिंकी। फिनलैंड में गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर के निर्माण के लिए लगभग चार लाख पेड़ों की अंधाधुंध कटाई किए जाने के कारण एक बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। इस परियोजना के लिए देश के मुहोस और ओतानमाकी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वनों को साफ किया गया है, जिसमें अकेले मुहोस में करीब ढाई लाख और ओतानमाकी के पास डेढ़ लाख पेड़ काटे जाने की पुष्टि फिनिश एसोसिएशन फॉर नेचर कंजर्वेशन के विशेषज्ञों ने की है।
पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर रोक
विवाद की मुख्य वजह यह है कि कंपनी ने आवश्यक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना ही पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू कर दिया था। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद, फिनलैंड के लाइसेंसिंग एंड सुपरविजन अथॉरिटी ने दोनों ही निर्माण स्थलों पर चल रहे कार्यों को अस्थायी तौर पर रोकने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, कंपनी के अधिकारियों ने पेड़ों की कटाई पर माफी मांगते हुए सफाई दी है कि उन्होंने उस समय कानून की अपनी समझ के आधार पर यह कदम उठाया था।
13 अरब यूरो का भारी-भरकम निवेश
यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग 13 अरब यूरो के विशाल निवेश से जुड़ा हुआ है, जिसे फिनलैंड के इतिहास में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना माना जा रहा है। फिनलैंड की ठंडी जलवायु, विशाल भूमि की उपलब्धता और भू-राजनीतिक स्थिरता इसे तकनीकी कंपनियों के लिए निवेश का एक प्रमुख केंद्र बनाती है, और देश के प्रधानमंत्री ने भी इससे बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ की उम्मीद जताई थी। बावजूद इसके, इस घटना ने पर्यावरण को हो रहे अपूरणीय नुकसान और आर्थिक फायदों के बीच एक गहरी बहस को जन्म दे दिया है।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर संकट
एआई डेटा सेंटरों के संचालन के लिए विशाल भूमि क्षेत्र, भारी-भरकम बिजली आपूर्ति और उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। हजारों कंप्यूटर सर्वर को चलाने के लिए अत्यधिक बिजली और पानी की खपत होती है, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती है। पेड़ों के कटने से न केवल प्राकृतिक वन क्षेत्र नष्ट हुआ है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण स्थल से बहकर आ रहा भूरा और गंदा पानी जलधाराओं को प्रदूषित कर रहा है, जबकि जंगल साफ होने के कारण भेड़िए जैसे वन्यजीव रिहायशी इलाकों के करीब आने लगे हैं। इसके अलावा, स्थानीय नागरिक निर्माण कार्यों से होने वाले शोर और घरेलू बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर भी आशंकित हैं।

