मृत तारे के इर्द-गिर्द मिलीं दो मलबा डिस्क, अंतरिक्ष के रहस्य से उठा पर्दा

वाशिंगटन। चिली में स्थित 'वेरी लार्ज टेलिस्कोप' (VLT) का उपयोग कर रहे खगोलविदों ने एक मृत तारे 'जे1328-1450' के चारों ओर मलबे की एक बेहद अनोखी और दुर्लभ दोहरी डिस्क की खोज की है। इस खोज में गैस के दो अलग-अलग छल्ले मिले हैं, जिनके बीच एक स्पष्ट खाली जगह यानी गैप मौजूद है। यह सफेद बौना (व्हाइट ड्वार्फ) तारा कभी हमारे सूर्य जैसा ही था, जो अपने जीवन के अंतिम चरण में अपनी बाहरी परतों को त्याग चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भयंकर खगोलीय तबाही के बाद भी प्लूटो के आकार का एक पिंड सुरक्षित बचा हुआ है, और यह दुर्लभ संरचना भविष्य में हमारे अपने सौरमंडल व पृथ्वी के संभावित अंत की एक स्पष्ट झलक पेश करती है।

दोहरी डिस्क और अलग-अलग घूमने की गति

यह खोज खगोल विज्ञान में इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह सामान्य मलबा डिस्क प्रणालियों से बिल्कुल अलग है। आमतौर पर सफेद बौने तारों के चारों ओर गैस वाली मलबा डिस्क एक ही घेरे में घूमती नजर आती है, लेकिन इस ताजा अध्ययन में गैस से निकलने वाली रोशनी के स्पेक्ट्रम में चार अलग-अलग पीक (शिखर) मिले हैं। इससे वैज्ञानिकों को दो अलग-अलग डिस्क की मौजूदगी का पता चला, जो भिन्न-भिन्न गति से चक्कर लगा रही हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन दोनों डिस्क को बनाए रखने में दो ग्रह-तुल्य पिंडों की मुख्य भूमिका हो सकती है, जिसमें एक एस्टेरॉयड जितना छोटा और दूसरा चंद्रमा या प्लूटो के आकार का हो सकता है। हालांकि, इन पिंडों को अभी तक प्रत्यक्ष रूप से देखा नहीं जा सका है।

तारों के अंत और मलबे के निर्माण की प्रक्रिया

जब सूर्य जैसे तारे अपनी आयु के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते हैं, तो वे फैलकर अपनी बाहरी परतें अंतरिक्ष में बिखेर देते हैं। इस उथल-पुथल के दौरान आसपास के कई ग्रह नष्ट हो जाते हैं या उनकी कक्षाएं पूरी तरह बदल जाती हैं। इसके बाद बचे हुए चट्टानी पिंड मृत तारे के अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण अस्थिर होकर टूट जाते हैं, जिससे धूल और गैस का मलबा तैयार होता है। यही मलबा अंततः मृत तारे के चारों ओर परिक्रमा करती हुई डिस्क का रूप ले लेता है।

रासायनिक संरचना और चट्टानी ग्रहों के अंश

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 'जे1328-1450' के मामले में, डिस्क में मौजूद पदार्थों और बचे हुए दोनों पिंडों की पारस्परिक गतिविधियां जुड़ी हुई हैं, जो गैस के उत्सर्जन का मुख्य कारण बनती हैं। टेलिस्कोप से प्राप्त स्पेक्ट्रम के विश्लेषण में कैल्शियम, ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और आयरन जैसे महत्वपूर्ण तत्वों के संकेत मिले हैं, जो सामान्यतः हमारे जैसे चट्टानी ग्रहों में भी पाए जाते हैं। दोनों डिस्क की रासायनिक संरचना में पाया गया अंतर यह भी संकेत देता है कि इन मंडलों को पदार्थ प्रदान करने वाले मूल पिंडों की बनावट एक-दूसरे से भिन्न रही होगी।

Latest news

Related news