उत्तराखंड में डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगी रफ्तार,‘जन परिचय’पर 100 से अधिक अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

NIC Uttarakhand:उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC), उत्तराखंड की ओर से देहरादून में ‘जन परिचय – पहचान एक, सेवाएं अनेक’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें राज्य के विभिन्न विभागों के 100 से अधिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

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एन.आई.सी. उत्तराखण्ड का “जन परिचय” कार्यशाला

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के अधिकारियों को राष्ट्रीय सिंगल साइन ऑन (SSO) प्लेटफॉर्म ‘मेरी पहचान’ की कार्यप्रणाली, विशेषताओं और उपयोगिता से परिचित कराना था. कार्यशाला में अधिकारियों को बताया गया कि एक ही डिजिटल पहचान के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच को किस तरह आसान बनाया जा सकता है.

कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के आईटी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने नागरिक-केंद्रित सेवाओं की तेज डिलीवरी और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने में ‘जन परिचय’ जैसे प्लेटफॉर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया.

NIC Uttarakhand:क्या है ‘जन परिचय’,कैसे मिलेगी नागरिकों को सुविधा?

‘जन परिचय’ राष्ट्रीय सिंगल साइन ऑन (SSO) व्यवस्था है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता एक ही डिजिटल पहचान और लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए विभिन्न सेवाओं तक पहुंच सकते हैं. इसका उद्देश्य अलग-अलग सेवाओं के लिए बार-बार अलग-अलग लॉगिन करने की जरूरत को कम करना और डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को आसान बनाना है.

कार्यशाला में अधिकारियों को इस प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और इससे जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी गई. साथ ही, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में इसके क्रियान्वयन से मिलने वाले संभावित लाभों पर चर्चा की गई.

NIC उत्तराखंड के राज्य सूचना-विज्ञान अधिकारी एवं उप महानिदेशक अरविंद कुमार दधीचि ने स्वागत भाषण में कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि राज्य की विभिन्न नागरिक-केंद्रित सेवाओं में ‘जन परिचय’ को लागू करने से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि ‘मेरी पहचान’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत जुलाई 2022 में गुजरात के गांधीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी. उनके अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से अब तक 3,000 से अधिक परियोजनाएं जुड़ चुकी हैं, प्रतिदिन 55 लाख से अधिक ट्रांजैक्शन होते हैं और 2 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता इससे लाभान्वित हो रहे हैं.

आईटी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे ने विभागों से की जल्द अपनाने की अपील

कार्यशाला के मुख्य अतिथि आईटी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं तेजी और सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है.

उन्होंने राज्य के सभी विभागों से ‘जन परिचय’ प्लेटफॉर्म को शीघ्र अपनाने का आह्वान किया. उनके अनुसार, इस तरह की डिजिटल पहल नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने और सरकारी कामकाज में तकनीक के उपयोग को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को प्लेटफॉर्म की उपयोगिता और विभागीय स्तर पर इसके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई. इसका उद्देश्य राज्य में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी रहा.

साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रमाणीकरण पर विशेष सत्र

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इसके बाद NIC मुख्यालय, नई दिल्ली के वैज्ञानिक-जी, उप महानिदेशक एवं समूह समन्वयक वी.टी.वी. रमण ने उद्घाटन संबोधन दिया. उन्होंने सरकारी सिंगल साइन ऑन प्लेटफॉर्म को नागरिक सेवाओं के लिए सुरक्षित व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया.

इसके बाद तकनीकी सत्रों में ‘जन परिचय’ की कार्यप्रणाली और इससे जुड़ी सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई.

NIC के वरिष्ठ निदेशक (आईटी) एवं जन परिचय प्रभाग से जुड़े संजय शर्मा ने ‘SSO जन परिचय’ विषय पर कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की. संयुक्त निदेशक (आईटी) अमित कुमार ने प्लेटफॉर्म की मूल्य-वर्धित सेवाओं के बारे में जानकारी दी.

कार्यशाला में साइबर सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया. इंडस्ट्री एक्सपर्ट वैभव पाठक ने डिजिटल प्रमाणीकरण प्रणालियों में सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला. इस सत्र में डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को समझाया गया.

अधिकारियों को दिया गया फीचर डेमो और माइग्रेशन का प्रशिक्षण

कार्यशाला के अंतिम तकनीकी सत्र में NIC के संयुक्त निदेशक (आईटी) कुंदन कुमार ने ‘जन परिचय’ के विभिन्न फीचर्स का प्रदर्शन किया. इसके साथ ही प्लेटफॉर्म पर माइग्रेशन की प्रक्रिया का व्यावहारिक डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया.

इस सत्र का उद्देश्य अधिकारियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल और इसे विभागीय सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया से भी परिचित कराना था.

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विभागों के 100 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया. इसके अलावा NIC उत्तराखंड राज्य इकाई के अधिकारी और विभिन्न जिलों से आए जिला सूचना-विज्ञान अधिकारी (DIO) भी मौजूद रहे.

डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर

कार्यक्रम के समापन पर NIC उत्तराखंड के उप महानिदेशक संजय गुप्ता ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया.

इस कार्यशाला के जरिए राज्य के अधिकारियों को राष्ट्रीय SSO प्लेटफॉर्म की तकनीकी विशेषताओं, सुरक्षा और माइग्रेशन प्रक्रिया की जानकारी दी गई. उत्तराखंड सरकार के विभागों में ‘जन परिचय’ को अपनाने पर जोर दिए जाने से डिजिटल सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है.

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