सोंग नदी की सेहत का ‘बायो इंडिकेटर’ प्रोजेक्ट से लगेगा पता, SARRA के तहत शोध शुरू

Song River Bio Indicator Project:देहरादून: पूर्वी दून घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोंग नदी की सेहत का पता अब उसमें रहने वाले जीव-जंतुओं और नदी किनारे पाई जाने वाली प्रजातियों के जरिए लगाया जाएगा. स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), उत्तराखंड ने सोंग नदी और उसकी पारिस्थितिकी का अध्ययन करने के लिए ‘बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट’ शुरू किया है. इस अध्ययन के जरिए नदी की जल गुणवत्ता, नदी किनारे के प्राकृतिक आवास और मानवीय गतिविधियों से पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाएगा.

इस परियोजना का उद्देश्य जैविक संकेतकों (Bioindicators) के आधार पर नदी के पर्यावरणीय स्वास्थ्य का मूल्यांकन करना है. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वी.पी. उनियाल के मार्गदर्शन में यह शोध पूरा किया जाएगा.

पांच जीव समूहों के जरिए जांची जाएगी नदी की सेहत

इस अध्ययन में पांच प्रमुख जीव समूहों को जैविक संकेतक के रूप में शामिल किया गया है. इनकी मौजूदगी, विविधता और संख्या से नदी के पानी तथा आसपास के पर्यावरण की स्थिति समझने में मदद मिलेगी.

इनमें जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स यानी पानी में पाए जाने वाले छोटे जीव, कीड़े और उनके लार्वा शामिल हैं. ये जल प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं और पानी की गुणवत्ता का संकेत देते हैं.

इसके अलावा तितलियों और जंगली मधुमक्खियों का अध्ययन किया जाएगा. इनकी प्रजातियां नदी किनारे की हरियाली और परागण की स्थिति को समझने में मदद करेंगी. वहीं, ड्रैगनफ्लाई और डेम्सलफ्लाई (ओडोनाटा) की मौजूदगी से पानी की स्वच्छता और नदी तट के प्राकृतिक आवास की स्थिति का पता लगाया जाएगा.

पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का सर्वे भी इस परियोजना का हिस्सा होगा. इनके अध्ययन से पूरी नदी घाटी और उसके आसपास के पारिस्थितिक गलियारे (Riverine Corridor) की सेहत का आकलन किया जा सकेगा.

80 किलोमीटर क्षेत्र में 36 स्थानों पर होगा सर्वे

सोंग नदी का यह अध्ययन उसके उद्गम स्थल कद्दूखाल, टिहरी से लेकर गंगा नदी के साथ संगम स्थल तेहरी फार्म, देहरादून तक किया जाएगा. करीब 80 किलोमीटर के नदी क्षेत्र को शोध के लिए चुना गया है.

अध्ययन को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए नदी को तीन हिस्सों में बांटा गया है. इनमें ऊपरी (Upper), मध्य (Middle) और निचला (Lower) क्षेत्र शामिल हैं. प्रत्येक क्षेत्र में 12 स्थायी सैंपलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इस तरह कुल 36 स्थानों पर सर्वे किया जाएगा.

परियोजना के तहत नवंबर से अप्रैल के बीच दो अलग-अलग चरणों में फील्ड सर्वे होगा. इसमें मानसून के बाद (Post-monsoon) और मानसून से पहले (Pre-monsoon) नदी तथा उसके आसपास के पर्यावरण की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा.

सोंग बांध, खनन और शहरीकरण के प्रभावों का होगा आकलन

छह महीने की इस परियोजना के जरिए सोंग नदी का एक व्यापक बेसलाइन डेटाबेस तैयार किया जाएगा. यह डेटाबेस भविष्य में नदी की पारिस्थितिकी में होने वाले बदलावों को समझने और उनकी निगरानी करने में मददगार होगा.

खास बात यह है कि इस अध्ययन से प्रस्तावित सोंग बांध, नदी क्षेत्र में होने वाले खनन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के संभावित प्रभावों का आकलन करने में भी मदद मिलेगी.

शोध के निष्कर्षों के आधार पर नदी संरक्षण और उसके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए प्रभावी नीतियां तैयार की जा सकेंगी. इस तरह बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट सोंग नदी की मौजूदा स्थिति समझने के साथ-साथ उसके भविष्य के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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