कांग्रेस में विलय के लिए तैयार है TMC, सोनिया-ममता और राहुल-अभिषेक की मुलाकात ने बाद अटकलों का बाजार गर्म

TMC Merger :नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पार्टी के अंदर मची भीषण बगावत के बीच टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरने की कगार पर है। मौजूदा स्थिति यह है कि पार्टी के 20 से अधिक सांसदों ने खुले तौर पर बागी रुख अख्तियार कर लिया है, जबकि 80 में से 60 विधायक पार्टी को दो फाड़ करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं। इस महासंकट के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने टीएमसी को राजनीतिक रसातल में जाने से बचाने के लिए एक चौंकाने वाला प्रस्ताव दिया है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने ममता बनर्जी के सामने अपनी पार्टी का पूर्ण विलय कांग्रेस में करने का प्रस्ताव रखा है.

TMC Merger : सोनिया गांधी की ‘जादू की झप्पी’ और बंद कमरे में हुई डील?

इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा दिल्ली में लिखी गई. दरअसल, ममता बनर्जी 9 जून को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA Block) की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आई थीं. इसी बैठक के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गर्मजोशी से गले लगाकर ममता बनर्जी का स्वागत किया. इस बैठक के समाप्त होने के बाद दोनों कद्दावर नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक एकांत में बातचीत हुई. राजनीतिक गलियारों में पुख्ता तौर पर माना जा रहा है कि इसी गुप्त मुलाकात के दौरान सोनिया गांधी ने टीएमसी के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव ममता बनर्जी के सामने रखा था.

ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक को महासचिव बनाने का ऑफर

सूत्रों से आ रही खबरों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी ने ममता बनर्जी को सम्मानजनक स्थान देने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. विलय के इस फॉर्मूले के तहत राष्ट्रीय कांग्रेस में ममता बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (National Vice President) और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का राष्ट्रीय महासचिव (National General Secretary) बनाने की पेशकश की गई है. हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने इस ऐतिहासिक फैसले पर विचार करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व से थोड़ा समय मांगा है.

अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से मुलाकात और ‘मल्लिकार्जुन खरगे’ वाले पद की मांग

इस बीच, राजनीतिक सरगर्मियां उस समय और तेज हो गईं जब 10 जून को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से विशेष मुलाकात की. लगातार दो दिनों तक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ टीएमसी आलाकमान की इन बैठकों ने विलय की खबरों को हवा दे दी है. चर्चा है कि राहुल गांधी से बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी ने अपनी तरफ से कुछ सख्त शर्तें भी सामने रख दी हैं. सूत्रों का दावा है कि अभिषेक बनर्जी ने मांग की है कि ममता बनर्जी को कांग्रेस के कोटे से राज्यसभा भेजा जाए और वहां उन्हें ‘नेता विपक्ष’ (Leader of Opposition) का पद सौंपा जाए, जो वर्तमान में कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे संभाल रहे हैं.

ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में विधायकों की बगावत से कमजोर हुईं ममता

टीएमसी के इस नाजुक मोड़ पर पहुंचने के पीछे पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली शिकस्त और उसके बाद पार्टी में हुई ऐतिहासिक टूट है. चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा धड़ा अलग हो गया था. टीएमसी के 58 विधायकों ने मिलकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता विपक्ष चुन लिया और राज्य विधानसभा के स्पीकर को बकायदा पत्र लिखकर इसकी जानकारी दे दी. ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष का पद मिलने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अब दिल्ली (संसद) में भी टीएमसी के भीतर बड़ी बगावत देखने को मिलेगी.

सांसदों का सामूहिक इस्तीफा और सायोनी घोष का बागी रुख

विधायकों के बाद लोकसभा और राज्यसभा में भी ममता बनर्जी की पकड़ पूरी तरह ढीली होती दिख रही है. पार्टी के कई वरिष्ठ सांसदों ने ममता बनर्जी की कार्यशैली पर सीधे निशाने साधने शुरू कर दिए हैं. राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे बड़े चेहरों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. वहीं दूसरी तरफ, लोकसभा में कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहीं काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 से अधिक सांसदों ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है और ममता से दूरी बना ली है. इस बागी गुट में हाल ही में ‘काबा-मदीना’ गीत गुनगुनाने के कारण चर्चाओं में आईं सांसद सायोनी घोष भी शामिल हैं.

हालांकि इन तमाम मुलाकातों और शर्तों को लेकर अभी तक कांग्रेस या टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक टीएमसी के भीतर मची इस भीषण भगदड़ और कांग्रेस के साथ लगातार हो रही शीर्ष बैठकों को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कुछ बहुत बड़ा उलटफेर होने वाला है.

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