बिहार के कई ज़िलों से भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की शुरुआत, जानिये क्या है मामला ?

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भारत देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खबरें आपने वक्त वक्त पर कई बार सुनी होगी. लेकिन इस बार खबर आ रही है कि भारत में मुस्लिम देशों के कानून लागू कर भारत को इस्लामिक देश बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इस प्रयास का आगाज़ झारखंड से हुआ था. जहाँ कुछ इलाकों में मुस्लिम देशों के तर्ज पर साप्ताहिक छुट्टियां शुक्रवार को दी जाती थी. और अब बिहार से भी इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं. जहाँ देश के कानून से परे मुस्लिम बहुल जिलों में हफ्ते की छुट्टी रविवार को नहीं बल्कि शुक्रवार को दी जा रही है. ये खबर सामने आते ही हर तरफ हंगामा मच गया है.

सबकी जुबां पर यही सवाल है कि जब पूरे देश में स्कूल और सभी सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थान को रविवार बंद रखने का कानून है. तो फिर कुछ स्कूलों में मुस्लिम देशों की तरह शुक्रवार की छुट्टी क्यों। एक ही राज्य के अलग अलग जिलों के लिए शुक्रवार की छुट्टी का क़ानून कब और किसने लागू किया.

कई लोगों का कहना है कि ये नियम आज से नहीं बल्कि कई सालों से चल रहा है. आज तक इसका विरोध नहीं किया गया. कई जानकारों का कहना है कि जिस भी इलाके में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है वहां के स्कूलों में ये कानून लागू है. खबर के सामने आते ही कई लोगों में इस नियम के खिलाफ गुस्सा भी दिखा.

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले के कुल 37 स्कूल ऐसे हैं जो शुक्रवार को बंद और रविवार को खुले रहते हैं।


अभी तक झारखण्ड के नोटिफ़ायड उर्दू स्कूलों को शुक्रवार कि छुट्टी रखने की अनुमति थी. लेकिन उसकी आड़ में केवल संथाल परगना के इलाके में करीब 70 जे ज्यादा स्कूलों में ये प्रथा चलने लगी. ये आंकड़ा सिर्फ संथाल परगना के 5 ज़िलों का है अगर पूरे राज्य को उठाकर देखें तो यही आंकड़ा 300 से 400 के करीब पहुँच जाएगा और अब यही कानून बिहार के किशनगंज जैसे कई मुस्लिम बहुल इलाकों से भी सामने आ रहा है। जहाँ के सरकारी स्कूल, मदरसे की राह पर चल पड़े हैं. जिस तरह मदरसों में शुक्रवार के दिन साप्ताहिक छुट्टी होती है, उसी प्रकार अब सरकारी स्कूलों में भी रविवार की जगह जुमे कि नमाज़ वाले दिन यानी शुक्रवार के दिन साप्ताहिक छुट्टी की परंपरा कई सालों से चल रही है. इस मामले पर शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने एक्शन लेने का एलान किया है.

ऐसे में कई सवाल खड़े होते हैं सिस्टम के खिलाफ कि आखिर ऐसे कैसे कोई इस तरह कि मनमानी कर सकता है।