केरलम। केरल के कोच्चि शहर में एक तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार द्वारा स्कूटर को जोरदार टक्कर मारे जाने और उसमें एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत के चर्चित मामले में एक नया और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादले के बाद पूर्व कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश कुमार ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए खुलकर सफाई दी है। उन्होंने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और चर्चाओं का स्पष्ट रूप से खंडन किया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि स्कूटर सवार की मौत के इस मामले में किसी उच्च न्यायालय या जिला न्यायालय के न्यायाधीश अथवा किसी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति ने उनके साथ कोई संपर्क किया था। गौरतलब है कि इस सनसनीखेज दुर्घटना की जांच में कथित लापरवाही बरतने और शुरुआती स्तर पर ढिलाई सामने आने की खबरों के बाद ही शासन स्तर पर उनका तबादला किया गया था। यह दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना गत पच्चीस अक्टूबर को कोच्चि में घटित हुई थी, जब एक अनियंत्रित मर्सिडीज कार ने दोपहिया वाहन को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे पचपन वर्षीय जयबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पीड़ित परिवार के गंभीर आरोप और न्यायिक प्रक्रिया
इस भीषण दुर्घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिवारजनों ने सीधे तौर पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन द्वारा इस पूरे मामले को कमजोर करने और आरोपी पक्ष को बचाने की एक गहरी साजिश रची गई थी। घटना के तुरंत बाद कार चला रहे सत्रह वर्षीय नाबालिग आरोपी को थाने से ही आसानी से जमानत मिल जाने के कारण शहर भर में तीव्र विरोध-प्रदर्शन हुए थे और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए थे। हालांकि बाद में जैसे ही मामले में कुछ नई धाराएं और आरोप जोड़े गए, तब जाकर नाबालिग को दोबारा हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने उसे जमानत प्रदान कर दी। इस मामले में आरोपी लड़के के पिता, जो कि एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं, उन्हें भी बाद में सह-आरोपी बनाया गया था, परंतु केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को फिलहाल उन्हें गिरफ्तार न करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
पुलिस कमिश्नर द्वारा बाहरी दबाव और फोन कॉल के दावों का खंडन
ऐसी सुगबुगाहट और खबरें जोरों पर थीं कि दुर्घटना के तुरंत बाद आरोपी जज ने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश कुमार से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था, और इसी राजनीतिक या न्यायिक दबाव के चलते ही उनका अचानक तबादला कर दिया गया है। इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए मीडिया से बातचीत करते हुए श्री कुमार ने दोटूक शब्दों में कहा कि उस न्यायाधीश ने कभी भी उनसे किसी प्रकार का कोई संपर्क नहीं किया था। उन्होंने इस बात का भी पुरजोर खंडन किया कि उन्हें इस संवेदनशील जांच को किसी विशेष दिशा में मोड़ने या किसी खास तरीके से निपटाने के लिए बाहर से कोई भी अवैध अनुरोध प्राप्त हुआ था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शुरुआती चरण से लेकर आज तक किसी भी बाहरी व्यक्ति ने उनसे संपर्क नहीं किया और पुलिस ने जांच में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं होने दिया है, बल्कि संपूर्ण अनुसंधान पूरी तरह से उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निष्पक्षता से आगे बढ़ाया गया है।
तबादले को बताया सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा
अपने अप्रत्याशित तबादले के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार की सजा नहीं बल्कि एक सामान्य प्रशासनिक कदम है जो सरकारी सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि हम सभी जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी और पुलिस सेवा के अधिकारी हैं, तथा इस प्रकार के तबादले और फेरबदल हमारे पेशेवर जीवन का एक सामान्य अंग हैं। उन्होंने मीडिया के समक्ष दोहराया कि इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई या ट्रांसफर को लेकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति या परेशानी नहीं है, और पुलिस बल हमेशा कानून के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य निभाता रहा है।

