बिलकिस बानो गैंग रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने 2 दोषियों को ज़मानत दी

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो गैंग रेप केस Bilkis Bano gang rape case में दो दोषियों को ज़मानत दे दी है. कोर्ट ने इस मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे 11 लोगों की समय से पहले रिहाई को रद्द करने के दो साल बाद, 17 साल की लंबी जेल की सज़ा का हवाला दिया है.
इन 11 लोगों को 2008 में तीन महीने की प्रेग्नेंट बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप करने और उनकी तीन साल की बेटी समेत उनके सात रिश्तेदारों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था. दंगों में 1,000 लोग मारे गए थे. गुजरात सरकार ने अगस्त 2022 में उनकी रिहाई का आदेश दिया, जिसकी काफी आलोचना हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की सजा माफी को किया था रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में कहा कि गुजरात के पास सज़ा कम करने का अधिकार नहीं है क्योंकि ट्रायल मुंबई शिफ्ट हो गया था, जिससे महाराष्ट्र इस फैसले के लिए ज़िम्मेदार हो गया. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट का 2022 का आदेश, जिसमें गुजरात सरकार को सज़ा माफ़ी पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, धोखे से और ज़रूरी तथ्यों को छिपाकर हासिल किया गया था.

17 साल जेल में रहने को बताया जमानत देने की वजह

जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने 28 अक्टूबर (बुधवार) को बिपिनचंद कनैयालाल जोशी और प्रदीप रमनलाल मोढिया को रिहा करने का आदेश दिया. मार्च में, बेंच ने गुजरात और महाराष्ट्र सरकारों से जवाब मांगा था, जब जोशी और मोढियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2017 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सज़ा और दोष को बरकरार रखा गया था.
बेंच ने 28 अक्टूबर के अपने ऑर्डर में कहा, “अपील करने वाले 17 साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं, और यह भी सच है कि अपील करने वालों में से एक (जोशी) को गंभीर विकलांगता है. निश्चित रूप से, अपील में तथ्य और कानून दोनों के आधार पर कई मुद्दों पर फैसला होना है.”
इसने बताया कि अपील करने वालों में से एक का नाम FIR में नहीं था और उसे लगभग तीन साल के काफी समय बाद फंसाया गया.

ट्रायल कोर्ट की शर्तों पर दी गई जमानत

गुरुवार देर रात अपलोड किए गए ऑर्डर में कहा गया कि दोनों को ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई जाने वाली शर्तों पर ज़मानत दी जा रही है.
जोशी और मोधियां की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा और सोनिया माथुर ने कोर्ट को बताया कि दोनों पर नौ अन्य लोगों के साथ हत्या और गैंगरेप से जुड़ी इंडियन पीनल कोड की धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया और उन्हें दोषी ठहराया गया और उन्हें आजीवन कारावास और जुर्माने की सज़ा सुनाई गई.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजकुमार भास्कर ठाकरे ने बेल का विरोध करते हुए कहा कि अपराधों में गैंग रेप शामिल है. ठाकरे ने कहा कि निचली अदालतों ने रिकॉर्ड में मौजूद मटीरियल और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा, जो बेल तय करने के लिए ज़रूरी है.

क्या है Bilkis Bano gang rape case

फरवरी 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के बाद गुजरात में हुए दंगों के दौरान जब बिलकिस बानो का गैंग रेप हुआ था, तब वह 21 साल की थीं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2003 में मामले की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) जांच का आदेश दिया. अगस्त 2004 में, इसने ट्रायल को मुंबई शिफ्ट कर दिया.
अगस्त 2022 में दोषियों को छूट मिलने और रिहा होने के कई साल बाद जोशी और मोधिया ने अपनी अपील दायर की. बानो ने छूट के आदेश को चुनौती दी, और सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में इसे रद्द कर दिया. तब से दोषी गुजरात की जेल में हैं.

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