नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की 38वीं रिपोर्ट में दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार धमाके को लेकर बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घातक हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़ा गुट 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) था। 10 नवंबर 2025 को हुए इस भयावह विस्फोट में 11 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
छोटे गुटों के जरिए पैर पसार रहा है AQIS
10 अगस्त को सार्वजनिक की गई इस यूएन रिपोर्ट में बताया गया है कि AQIS अब एक बिखरे हुए गुट से निकलकर एक मजबूत क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। संगठन ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के बजाय छोटे और स्वतंत्र सेल्स के माध्यम से काम करने के लिए अपनी वित्तीय और लॉजिस्टिक व्यवस्था को बेहद मजबूत किया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दिल्ली कार ब्लास्ट की साजिश और क्रियान्वयन में AQIS की मुख्य भूमिका थी। इससे पहले इस हमले का संदेह जैश-ए-मोहम्मद पर जताया जा रहा था, लेकिन अब यूएनएससी ने आधिकारिक तौर पर AQIS का हाथ होने की पुष्टि की है।
2014 में हुआ था आतंकी संगठन का गठन
AQIS का गठन 2014 में अल-कायदा के एक क्षेत्रीय विंग के रूप में किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे दक्षिण एशिया में अपनी जड़ें फैलाना है। इस आतंकी नेटवर्क की गतिविधियां भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक फैली हुई हैं। रिपोर्ट में खासतौर पर बांग्लादेश के भीतर इस संगठन द्वारा अपना कैडर और ढांचा खड़ा करने की कोशिशों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
जैविक और रासायनिक हथियारों की फिराक में आतंकी
यूएनएससी की रिपोर्ट में एक और चिंताजनक खुलासा किया गया है कि अल-कायदा और उससे जुड़े संगठन रासायनिक व जैविक हथियार (Chemical and Biological Weapons) हासिल करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जटिल तकनीकी बाधाओं के कारण वे अब तक इसमें पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। इसके बावजूद, ये आतंकी नेटवर्क छोटे-छोटे छिटपुट गुटों के सहारे अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की खतरनाक क्षमता विकसित कर रहे हैं।

