भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और आम जनमानस की समस्याओं के मौके पर ही निपटारे के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने 'फील्ड वाला फ्राइडे' नामक एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत अधिकारी अब दफ्तरों से निकलकर सीधे धरातल पर जनता के बीच पहुंचेंगे। यह अभियान आगामी 7 अगस्त से प्रारंभ होकर अगले वर्ष 8 जनवरी 2027 तक, यानी कुल पांच महीनों तक लगातार संचालित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखना और शिकायतों का त्वरित समाधान करना है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
इस महत्वपूर्ण पहल को अमलीजामा पहनाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागाध्यक्षों, संभाग आयुक्तों और जिला कलेक्टर्स को विस्तृत गाइडलाइन भेज दी है। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक सप्ताह का शुक्रवार केवल मैदानी निरीक्षण के लिए समर्पित रहेगा। इस दौरान अधिकारियों को कम खर्च में काम निपटाने और वाहनों की पूलिंग (Vehicle Pooling) करने की सलाह दी गई है, जिससे प्रशासनिक व्यय को भी नियंत्रित रखा जा सके।
शुक्रवार को रद्द रहेंगी सभी बैठकें, अफसरों का ग्राउंड पर रहना अनिवार्य
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने शुक्रवार के दिन अधिकारियों के लिए हर प्रकार की ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन समीक्षा बैठकों (Review Meetings) पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सभी आला अधिकारियों को केवल क्षेत्र में ही रहना होगा, हालांकि उन्हें प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार निरीक्षण के लिए जिले या क्षेत्र का चयन करने की छूट रहेगी। यदि कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या विभागाध्यक्ष किसी कारणवश दौरे पर जाने में असमर्थ रहता है, तो उसे इसकी पूर्व सूचना मुख्य सचिव कार्यालय को देना अनिवार्य होगा।
सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी के लंबित मामलों पर रहेगा फोकस
इस पूरे अभियान का केंद्र बिंदु आम नागरिकों से जुड़ी शिकायतें और सरकारी योजनाएं होंगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सीएम हेल्पलाइन, साप्ताहिक जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लंबित पड़े आवेदनों की गहन समीक्षा करें। अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर मामलों का निस्तारण करने को कहा गया है ताकि बेवजह किसी भी फाइल या शिकायत को अटकाया न जा सके। संभाग स्तर पर पदस्थ अपर और संयुक्त संचालकों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

