चुनावी हार के बाद BJP का मंथन, समीक्षा बैठक में प्रशांत किशोर की रणनीति बनी चर्चा का केंद्र

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर मंथन का दौर जारी है। बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्वीकार किया गया कि पार्टी जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) द्वारा खड़े किए गए राजनीतिक नैरेटिव का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में असफल रही। बैठक में इस शिकस्त को हाल के वर्षों में पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी हारों में से एक माना गया।

प्रशांत किशोर के नैरेटिव का नहीं मिल सका तोड़

प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में आयोजित इस समीक्षा बैठक में कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि कमजोर संगठन के बावजूद जन सुराज ने अपनी रणनीति और समन्वय के बल पर पारंपरिक भाजपा गढ़ में प्रभावी माहौल बनाया। इसके अलावा ग्राउंड पर तैनात किए गए 50 से अधिक विधायकों की निष्क्रियता और स्थानीय मतदाताओं की नाराजगी को समय रहते न भांप पाना भी हार का प्रमुख कारण रहा।

'कुत्ता-बिल्ली' विवाद पर ढुलमुल रवैया और आक्रामकता की कमी

मंथन के दौरान चुनाव प्रचार के समय उभरे 'कुत्ता-बिल्ली' विवाद पर पार्टी के रक्षात्मक रुख को भी नुकसानदेह माना गया। नेताओं का मानना था कि यद्यपि वरिष्ठ नेताओं ने इसका खंडन किया था, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के करीबी प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के होने के कारण राज्य इकाई इस मुद्दे पर अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा सकी।

अंतिम समय में प्रत्याशी बदलने से गया गलत संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों और समीक्षा रिपोर्ट दोनों ने उम्मीदवार बदलने के फैसले को आत्मघाती माना। भाजपा ने पहले अभिषेक 'बंटी' को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन नामांकन के अगले ही दिन उन्होंने नाम वापस ले लिया, जिसके बाद नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया। इस घटनाक्रम से मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई।

गौरतलब है कि जिस बांकीपुर सीट से नितिन नवीन लगातार पांच बार विधायक रहे, वहां जन सुराज के उम्मीदवार ने भाजपा प्रत्याशी को 19,324 मतों से पराजित किया। हालांकि बैठक में किसी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को दिल्ली भेज दी गई है।

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