MP Building Rules: मास्टर प्लान रहित शहरों में बदलेगा बिल्डिंग नियमों का ढांचा, नक्शा पास कराने की प्रक्रिया होगी आसान

भोपाल। मध्य प्रदेश में भवन निर्माण और टाउन प्लानिंग से जुड़े नियमों को आधुनिक, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिन शहरी क्षेत्रों में औपचारिक मास्टर प्लान लागू नहीं है या जो क्षेत्र मास्टर प्लान के दायरे से बाहर आते हैं, वहाँ भवन निर्माण अनुमति और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने के लिए नए प्रावधान तैयार किए गए हैं। इस बदलाव से नागरिकों को अब बिना मास्टर प्लान वाले शहरों में भी नक्शा स्वीकृत कराने में बड़ी राहत मिलेगी।

वैकल्पिक नियमों के जरिए भूमि उपयोग का निर्धारण

बिना मास्टर प्लान वाले शहरों और कस्बों में भूमि के उपयोग का निर्धारण अब राजस्व रिकॉर्ड, मौजूदा जोनिंग और स्थानीय निकाय के सामान्य नियमों के आधार पर किया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों में भवन की ऊंचाई, फ्लोर एरिया रेशो और सेटबैक मुख्य रूप से पहुंच मार्ग की चौड़ाई और भूखंड के क्षेत्रफल के मानकों के अनुसार तय किए जाएंगे, ताकि भविष्य में यातायात और बुनियादी सुविधाओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव न पड़े।

ऑनलाइन पोर्टल और जीपीएस लोकेशन से पारदर्शी प्रक्रिया

प्रदेश में नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बना दिया गया है। मास्टर प्लान रहित क्षेत्रों के आवेदकों को भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने प्लॉट के दस्तावेज, ओनरशिप प्रूफ और आर्किटेक्ट द्वारा तैयार ड्राइंग अपलोड करनी होती है। इसके साथ ही भूखंड के कोनों के जीपीएस कोऑर्डिनेट्स दर्ज करना अनिवार्य किया गया है, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति और उसकी सीमाओं का सटीक सत्यापन हो सके और यह स्पष्ट हो सके कि जमीन किसी प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में स्थित नहीं है।

छोटे भूखंडों पर विशेष राहत और सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता

छोटे आवासीय भूखंडों के मामलों में नागरिकों को राहत देते हुए प्रक्रिया को काफी आसान किया गया है। निर्धारित मापदंडों और स्व-घोषणा के आधार पर कई मामलों में त्वरित या डीम्ड अनुमति का प्रावधान किया गया है, जिससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भले ही किसी क्षेत्र में मास्टर प्लान लागू न हो, लेकिन संरचनात्मक सुरक्षा, राष्ट्रीय भवन कोड के नियमों, अग्निशमन सुरक्षा और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसे पर्यावरण मानकों का पालन करना अनिवार्य रूप से जारी रहेगा।

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