जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में सरकारी अनुदान राशि के दुरुपयोग और गबन का एक बड़ा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। कृषि विभाग द्वारा की गई एक विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रायसेन जिले में पंजीकृत 'बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड' नामक कंपनी के नीति-निर्धारकों और स्टाफ ने मिलीभगत कर जाली दस्तावेज, कूटरचित बैंक खाते और कागजी किसान सदस्यों के जरिए शासन को करीब उनतालीस लाख सड़सठ हजार सात सौ इक्यासी (39,67,781) रुपये का चूना लगाया। इस बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कंपनी के छह निदेशकों (डायरेक्टर्स) और तीन कर्मचारियों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है।
दस्तावेजों में लगाया फर्जी बैंक खाता, वेरिफिकेशन में खुली पोल
विभागीय जांच के दौरान सामने आया कि इस निजी बीज उत्पादक कंपनी ने सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ लेने और अपनी वित्तीय साख को मजबूत दिखाने के लिए आवेदन के साथ आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक का एक खाता नंबर प्रस्तुत किया था। जब कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने इस खाते की सत्यता जांचने के लिए संबंधित बैंक प्रबंधन से संपर्क किया, तो पता चला कि वह खाता नंबर इस कंपनी के नाम पर दर्ज ही नहीं था। कागजों में किसी दूसरे के खाते को अपना बताकर पेश करने से अधिकारियों का शक गहरा गया और पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
ग्रामीणों के नाम पर फर्जी सदस्यता का खेल, नियुक्तियों में भी भारी धांधली
कंपनी ने सरकारी पात्रता और सब्सिडी की शर्तें पूरी करने के लिए सैकड़ों स्थानीय ग्रामीणों को कागजों पर अपना किसान सदस्य दर्शा रखा था। जब जांच टीम ने सूची में दिए गए मोबाइल नंबरों पर रैंडम कॉलिंग कर सीधे ग्रामीणों से बात की, तो हकीकत सामने आ गई। कई ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि उनका इस बीज कंपनी से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है और न ही वे इसके मेंबर हैं। इसके अलावा, कंपनी के प्रबंधक मनीष चौरसिया, एकाउंटेंट कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा की नियुक्तियों में भी भारी प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गईं। रिकॉर्ड खंगालने पर इन कर्मचारियों की बहाली से जुड़ा कोई भी वैध प्रस्ताव या बोर्ड बैठक का ब्योरा नहीं मिला और कई अहम दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों में भी भारी भिन्नता पाई गई।
किसान महासंघ की शिकायत पर पुलिसिया कार्रवाई, नौ आरोपियों पर केस दर्ज
इस पूरे सुनियोजित घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत पर गठित जांच दल की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने पाटन थाने में औपचारिक मामला दर्ज कराया। पुलिस ने कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों—सचिन दुबे, रंजना पाण्डे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पाण्डे, उमा सिंह और कर्मचारियों सहित नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने की गंभीर धाराओं में मुकदमा कायम किया है। फिलहाल पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश करने के साथ-साथ पूरे बैंक लेनदेन को खंगाल रही हैं।

