जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में धनतेरस की रात एक अत्यंत हृदय विदारक भीषण अग्निकांड सामने आया है। शहर के गोहलपुर थाना अंतर्गत लेमा गार्डन के पास स्थित गाजी नगर मैदान की झुग्गियों में अचानक उठी विकराल लपटों ने 50 से अधिक गरीब परिवारों के आशियाने पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिए। दीपावली के आगमन की तैयारियों और त्योहार की खुशियों में डूबे शहर के बीच घटी इस अप्रिय घटना से समूचे क्षेत्र में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस व अग्निशमन दल की 12 से अधिक गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया। गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में अब तक किसी जनहानि या व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है।
गृहस्थी का संपूर्ण सामान और अनाज जलकर हुआ राख
अग्निकांड की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रभावित गरीब परिवारों का वर्ष भर का संचित अनाज, कपड़े और गृहस्थी का तमाम जरूरी सामान पल भर में जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गया। पीड़ित परिवारों के पास न तो रात बिताने के लिए बिस्तर बचे हैं और न ही भोजन पकाने के लिए राशन बचा है। त्योहार की उमंग के बीच बेघर हुए इन असहाय लोगों की आंखों के सामने सिर्फ तबाही का मंजर बिखरा पड़ा है।
प्रशासनिक अमले की त्वरित कार्रवाई और राहत कार्य
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड का प्रशासनिक अमला तत्काल एक्शन मोड में आ गया। अग्निशमन विभाग के अधिकारी ओम प्रकाश अहिरवार के अनुसार, कंट्रोल रूम से सूचना प्राप्त होते ही दमकल की एक दर्जन से अधिक गाड़ियों को त्वरित राहत कार्य के लिए मौके पर रवाना किया गया था। वहीं, कोतवाली सीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि किसी भी संभावित खतरे को रोकने के उद्देश्य से बिजली विभाग द्वारा क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति तुरंत बंद करवाई गई और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसके उपरांत कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
आग लगने का कारण और पूर्व की घटनाएं
शुरुआती तौर पर आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसकी सटीक वजहों की विस्तृत जांच की जा रही है। जिस स्थल पर यह हादसा हुआ, वहां 350 से भी अधिक झुग्गियों की घनी बस्ती स्थित है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस परिसर में पूर्व में भी दो बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि शीतलहर और मलबे की पूरी तरह सफाई के उपरांत ही इस बात का सटीक आकलन हो पाएगा कि इस विभीषिका में कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।

