भोपाल। दिवाली का त्योहार पास आते ही मार्केट में एक बार फिर चोरी-छिपे प्रतिबंधित कार्बाइड गन बेची जा रही है। पिछले साल हुए हादसों के बाद भी लोग इसे खरीदने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस खतरनाक गन की ऑनलाइन बिक्री भी चल रही है और सीधे होम डिलीवरी का दावा किया जा रहा है। कार्बाइड गन में कैल्शियम और दूसरे केमिकल्स मिलाकर तेज़ धमाका किया जाता है, जिससे बच्चे इसकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके साथ ही, आसमान में उड़ाए जाने वाले हॉट एयर बैलून भी पिछले साल कई जगहों पर आग की वजह बने थे, जिसकी वजह से इन पर भी बैन लगाया गया है। हालांकि लीगल पटाखा बाज़ारों में यह सामान नहीं मिल रहा, लेकिन कुछ लोग चोरी-छिपे इसे अब भी बेच रहे हैं।
एम्स ने जारी की चेतावनी
एम्स ने दिवाली पर कार्बाइड गन और देसी पटाखों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। इनके फटने से आँख, चेहरे, हाथ और कान में गंभीर चोट लग सकती है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी हादसे की स्थिति में तुरंत आँख के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इससे हमेशा के लिए अपाहिज होने या रोशनी जाने का खतरा रहता है। एम्स ने पेरेंट्स से भी अपील की है कि वे त्योहार के दौरान बच्चों पर पूरी नज़र रखें।
पिछले साल बच्चे ने गंवाई थी आँख की रोशनी
पिछले साल हुए एक हादसे में शमशाबाद के धोबीखेड़ा गाँव के रहने वाले ऋतिक अहिरवार की आँख की रोशनी चली गई थी। ऋतिक के पिता जसवंत सिंह ने बताया कि दिवाली पर एक बच्चा कार्बाइड गन चला रहा था, तभी अचानक गन का रुख ऋतिक के चेहरे की तरफ हो गया और तेज़ धमाके से उसकी आँख में गंभीर चोट आ गई। भोपाल एम्स, आनंदपुर और चित्रकूट में लंबे इलाज के बाद अब डॉक्टरों ने बच्चे को आगे के इलाज के लिए चेन्नई ले जाने की सलाह दी है।
जानिए क्या होती है कार्बाइड गन
कार्बाइड गन प्लास्टिक या PVC पाइप, गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड से बनाया जाने वाला एक देसी जुगाड़ है। इसका असली इस्तेमाल किसान खेतों में बंदरों और जानवरों को भगाने के लिए करते थे, लेकिन अब इसे पटाखों की जगह इस्तेमाल किया जाने लगा है। पाइप के अंदर कैल्शियम कार्बाइड में पानी मिलाने से बेहद ज्वलनशील एसिटिलीन गैस बनती है। जैसे ही लाइटर से चिंगारी दी जाती है, वैसे ही बंदूक की तरह बहुत तेज़ धमाका और आग निकलती है, जो बेहद जानलेवा साबित हो सकती है।

