बालों का टूटना और सफेद होना सिर्फ उम्र नहीं, शरीर की कमी का भी हो सकता है संकेत

अमूमन लोग बालों के टूटने, असमय सफेद होने या डैंड्रफ जैसी दिक्कतों को बदलते मौसम, धूल-प्रदूषण या फिर गलत शैंपू-तेल का नतीजा मान लेते हैं। मगर देश की राजधानी नई दिल्ली के त्वचा और केस रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आपके बाल असल में आपके भीतर की सेहत का आईना होते हैं। बालों की खराब स्थिति शरीर के आंतरिक अंगों में चल रही गंभीर पोषण संबंधी कमियों (न्यूट्रिशनल डेफिशियेंसी) का सीधा अलार्म हो सकती है।

चिकित्सकों के मुताबिक, बालों का असमय पकना, वॉल्यूम कम होना, रूखापन या रूसी होना महज एक सतही समस्या नहीं है। इसके पीछे मुख्य रूप से प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी-12, जिंक, विटामिन-सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे जरूरी तत्वों की भारी कमी जिम्मेदार होती है। आज की व्यस्त जीवनशैली, जंक फूड और मानसिक तनाव का सबसे पहला दुष्प्रभाव बालों की जड़ों पर पड़ता है। ऐसे में महंगे हेयर स्पा या कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स पर पैसे खर्च करने से बेहतर है कि शरीर की अंदरूनी जरूरतों को समझा जाए। संतुलित खान-पान और शुद्ध हर्बल तेलों की मदद से इन दिक्कतों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

आइए जानते हैं बालों की कौन सी समस्या किस कमी को दर्शाती है और इसके घरेलू उपचार क्या हैं:

1. बालों का पतला होना (थिनिंग हेयर)

  • मुख्य कारण: यदि आपके बाल दिन-ब-दिन पतले और बेजान होते जा रहे हैं, तो यह शरीर में आयरन (लोह तत्व) की भारी कमी का लक्षण है। आयरन का मुख्य काम स्कैल्प की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाना है, जिसके अभाव में बालों की जड़ें सिकुड़ने लगती हैं।

  • समाधान: मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों से युक्त नारियल तेल को गुनगुना करके हफ्ते में दो से तीन बार सिर की अच्छे से चंपी करें। इसके साथ ही भोजन में खजूर, काले तिल, गुड़ और मोरिंगा पाउडर को नियमित रूप से शामिल करें।

2. अत्यधिक बाल झड़ना (हेयर फॉल)

  • मुख्य कारण: कंघी करते या नहाते समय गुच्छों में बालों का टूटना केवल जेनेटिक या तनाव की वजह से नहीं होता। जब भोजन में प्रोटीन और आयरन की मात्रा बेहद कम हो जाती है, तो बाल 'रेस्टिंग फेज' में चले जाते हैं और तेजी से गिरने लगते हैं।

  • समाधान: बालों की जड़ों को मजबूती देने के लिए शुद्ध भृंगराज तेल से नियमित मालिश करें। अपनी दैनिक डाइट में भीगे हुए काले चने, मशरूम, मोरिंगा और रात की भीगी हुई उड़द दाल जैसी प्रोटीन युक्त चीजों की मात्रा बढ़ाएं।

3. उम्र से पहले बालों का पकना (ग्रेइंग हेयर)

  • मुख्य कारण: कम उम्र में ही युवाओं के बाल सफेद होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ विटामिन B12 की कमी का होता है। यह खास विटामिन बालों को प्राकृतिक काला रंग देने वाले मेलेनिन (Melanin) पिगमेंट को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

  • समाधान: कलौंजी (मंगरैल) के तेल से हफ्ते में दो बार स्कैल्प की मालिश करें। खान-पान में करी पत्ता, रात के भीगे हुए बादाम और सफेद या काले तिल का सेवन बहुत फायदेमंद साबित होता है।

4. डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन (रूसी)

  • मुख्य कारण: सिर में बार-बार जिद्दी डैंड्रफ का होना केवल गंदगी के कारण नहीं, बल्कि शरीर में जिंक और विटामिन B6 की कमी की वजह से होता है। इन तत्वों की कमी से स्कैल्प की त्वचा रूखी होकर पपड़ी की तरह छूटने लगती है।

  • समाधान: एंटीफंगल गुणों से भरपूर नीम के शुद्ध तेल को स्कैल्प पर लगाएं। आंतरिक सुधार के लिए कद्दू के बीज (पंपकिन सीड्स), शकरकंद, हरी पालक और मेथी दाने का पानी डाइट में लें।

5. रूखापन और बालों का बीच से टूटना (ड्राई एंड डैमेज्ड हेयर)

  • मुख्य कारण: यदि बालों की प्राकृतिक चमक गायब हो चुकी है और वे छूने पर झाड़ू जैसे रूखे लगते हैं, तो आपके शरीर को ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन C की तत्काल जरूरत है। ये तत्व बालों को मॉइस्चराइज और हाइड्रेट रखते हैं।

  • समाधान: बालों की लेंथ पर आंवले का तेल लगाएं। इसके साथ ही रोज एक ताजा आंवला खाएं, संतरे का जूस पिएं और अखरोट तथा चिया सीड्स को अपनी स्मूदी या सलाद में शामिल करें।

महत्वपूर्ण नोट: ब्लड टेस्ट भी है जरूरी

हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि यदि तमाम घरेलू उपायों और बेहतर खान-पान के बावजूद बालों का झड़ना या अन्य समस्याएं 2-3 महीने से अधिक समय तक लगातार जारी रहें, तो किसी योग्य ट्राइकोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC), थायराइड प्रोफाइल, सीरम फेरिटिन और हार्मोनल टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार एनीमिया या थायराइड की गड़बड़ी भी गंजेपन का कारण बन सकती है।

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