साल में कुल 24 एकादशी का आगमन मानव कल्याण के लिए होता है. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली बनी रहती है. संवत में चातुर्मास आषाढ़ माह से शुरू होता है. चातुर्मास का समय पूजा पाठ, आराधना, व्रत, भक्ति में लीन आदि के लिए बेहद ही खास बताया गया है.
संयोग से संवत 2083 में चातुर्मास के पहले पक्ष में दो एकादशियों का आगमन हो रहा है. दो एकादशी के आगमन से गृहस्थ जीवन जीने वाले साधक और साधु संत चातुर्मास के पहले पक्ष की दो एकादशियों पर विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं.
योगिनी एकादशी पर व्रत साधना
इसकी जानकारी देते हुए पंडित श्रीधर शास्त्री ने कहा कि एकादशी का व्रत करना बेहद ही फलदायक होता है. चातुर्मास के पहले आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में दो एकादशियों के आगमन से गृहस्थ जीवन जीने वाले और वैष्णव संप्रदाय यानी साधु-संतों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होगी. 10 जुलाई को सांसारिक जीवन बिताने वाले जीने वाले साधक योगिनी एकादशी का व्रत करके जीवन में चल रही सभी समस्याओं से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं. वहीं 11 जुलाई को साधु-संत योगिनी एकादशी का नियम पूर्वक व्रत करके भगवान विष्णु का सानिध्य प्राप्त करेंगे.
मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
चातुर्मास के पहले माह की पहली एकादशी के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए पंडित श्रीधर शास्त्री ने आगे कहा कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को सबसे अधिक प्रिय होती है. एकादशी का व्रत करने और विष्णु भगवान की पूजा अर्चना, उनके मंत्र का जाप, स्तोत्र का पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम आदि का पाठ नियम पूर्वक करने से जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. विष्णु लोक के रास्ते साधक के लिए खुल जाते हैं. चातुर्मास के शुरुआत में दो एकादशियों के आगमन से सांसारिक जीवन जीने वाले साधक और वैराग्य यानी साधु-संत दोनों ही इस विशेष योगिनी एकादशी का शुभ फल प्राप्त करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं.

