बीजेपी बूथ एजेंट की मुश्किलें बढ़ीं, 36 फर्जी फॉर्म-7 भरने के आरोपों की शिकायत

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहां मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए कथित तौर पर फर्जी आवेदन पत्र जमा कराए जाने का खुलासा हुआ है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) अजय कुमार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निर्वाचन विभाग द्वारा की गई गहन जांच के दौरान मुस्तफाबाद क्षेत्र में जमा किए गए कुल 37 में से 36 फॉर्म-7 पूरी तरह से फर्जी पाए गए हैं। इस गंभीर अनियमितता और धोखाधड़ी को संज्ञान में लेते हुए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) चंद्रशेखर नैनवाल के विरुद्ध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई करने के लिए पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

मतदाता सूची से नाम हटाने के फर्जी आवेदनों का पूरा प्रकरण

यह पूरा विवाद मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मतदान केंद्र भाग संख्या 129 से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस क्षेत्र में सोची-समझी रणनीति के तहत मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जो जमीनी सत्यापन के दौरान अपने मूल पतों पर ही सकुशल निवास करते हुए पाए गए। निर्वाचन अधिकारियों की जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाने के लिए आवेदन दिए गए थे, उनमें बहुसंख्यक मतदाता मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक अभिलेखों के मुताबिक, गत 28 अक्टूबर तक अकेले इसी मतदान केंद्र से 28 फॉर्म-7 जमा किए गए थे, जिनमें मतदाताओं के नाम हटाने की पुरजोर मांग की गई थी। इन तमाम विवादित आवेदनों में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति के कॉलम में भाजपा से जुड़े बूथ लेवल एजेंट चंद्रशेखर नैनवाल का नाम दर्ज पाया गया था, हालांकि मीडिया से बातचीत के दौरान आरोपी एजेंट ने इन फॉर्मों को जमा करने के आरोपों के साथ-साथ किसी भी राजनीतिक दल से अपने जुड़ाव होने से साफ इंकार किया था। इसके पश्चात 29 और 30 अक्टूबर को भी इसी नाम से 9 और नए आवेदन दाखिल किए गए, जिनमें मतदाताओं के नाम काटने का मुख्य आधार उन्हें 'अनुपस्थित', 'स्थानांतरित' या 'मृत' दर्शाया गया था।

प्रशासनिक जांच और सत्यापन में फर्जीवाड़े का खुलासा

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार के निर्देशानुसार चुनाव अधिकारियों ने सभी 37 आवेदनों का स्वतंत्र और निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया। इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) ने सीधे संबंधित मतदाताओं के घरों पर जाकर उनकी उपस्थिति की जांच की। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन तीन मतदाताओं को आधिकारिक दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया था, वे वास्तव में जीवित पाए गए। इसके अलावा अन्य जिन मतदाताओं को उनके पतों से अनुपस्थित बताया गया था, वे भी अपने दर्ज पतों पर ही रहते हुए मिले। निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुल 37 में से मात्र 1 आवेदन ही वैध पाया गया, जबकि शेष 36 आवेदन पूरी तरह से भ्रामक, मनगढ़ंत और फर्जी साबित हुए। जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में दोहराया गया कि फॉर्म-7 जैसे संवेदनशील दस्तावेजों में जानबूझकर गलत विवरण या झूठी घोषणाएं प्रस्तुत करने के गंभीर कृत्य के मद्देनजर संबंधित बीएलए के खिलाफ कानून सम्मत विधिक कार्रवाई का विधिवत आगाज कर दिया गया है।

अन्य बूथ एजेंटों की संलिप्तता और व्यापक स्तर पर जांच

प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग के पास 3 नवंबर तक कुल 1,021 फॉर्म-7 के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से लगभग 77 प्रतिशत से अधिक आवेदनों में अकेले 20 विभिन्न भाजपा बूथ लेवल एजेंटों को आपत्तिकर्ता के रूप में नामित किया गया था। इन सभी विवादित आवेदनों का मुख्य केंद्रबिंदु भी विशेष रूप से मुस्लिम बहुल मतदाताओं के नाम सूची से हटवाना ही था। जब इन मामलों की भी रैंडम जांच की गई तो अधिकांश मतदाता अपने पतों पर सही सलामत पाए गए। निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक अमला इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए इसकी तह तक जाने का प्रयास कर रहा है, और अधिकारियों ने कड़े शब्दों में यह भरोसा दिलाया है कि चुनावी शुचिता को प्रभावित करने वाले इस प्रकार के कृत्यों में शामिल पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा तथा मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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