नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को मंगलवार को अंतरिम जमानत भले ही दे दी, लेकिन उस पर शर्तों का सख्त पहरा भी लगा दिया है। अदालत ने कहा है यदि उसने किसी शर्त का उल्लंघन किया तो बीच में ही राहत छिन सकती है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर एक दलित शख्स के साथ मारपीट करने की वजह से एससी-एसटी ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यू्ट्यूबर और खुद को हिंदुवादी कार्यकर्ता कहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत ने तीन सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। नियमित जमानत याचिका पर विचार से पहले अदालत देख लेना चाहती है कि बाहर निकलने के बाद उसका आचरण कैसा रहता है। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ जमानत देते हुए जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता को अधिकार दिया है कि यदि वह किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो तुरंत इसकी सूचना दी जाए ताकि उसको मिली राहत की समीक्षा का जा सके या दोबारा जेल भेजा जा सके। बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की कोर्ट ने कहा कि भारद्वाज दस दिन से कुछ अधिक समय से हिरासत में हैं और यह अवधि उन्हें अपने आचरण पर विचार करने के लिए पर्याप्त थी। बुधवार को आए फैसले में अदालत ने भारद्वाज को 50 हजार के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर अंतरिम जमानत दी। राहत देते हुए अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाईं हैं।

