नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक संवेदनशील मामले में 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के प्रमुख नेताओं पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले की गहन जांच को आगे बढ़ाते हुए संगठन के तीन मुख्य पदाधिकारियों सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिनडे को आधिकारिक नोटिस भेजकर बुधवार को पूछताछ के लिए तलब किया है। पुलिस समन मिलने के पश्चात आज इन तीनों नेताओं को क्राइम ब्रांच के समक्ष उपस्थित होकर जांच प्रक्रिया में शामिल होना होगा।
तिहाड़ से रिहाई के तुरंत बाद नेताओं के समक्ष नया कानूनी संकट
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका हाल ही में तिहाड़ जेल से जमानत पर बाहर आए थे। जेल से रिहा होने के कुछ ही दिनों के भीतर क्राइम ब्रांच द्वारा नया समन जारी होने से इन नेताओं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इनके साथ ही अजिंक्य शिनडे को भी इस जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन तीनों पदाधिकारियों से आमने-सामने पूछताछ कर प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों और घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ियों को आपस में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
सरकारी आदेशों के उल्लंघन और अवैध प्रवेश के गंभीर आरोप
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान तय नियमों और प्रशासनिक पाबंदियों की अनदेखी करने से जुड़ा हुआ है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त नेताओं पर यह भी आरोप है कि जंतर-मंतर की ओर बढ़ते समय वे बिना किसी पूर्व अनुमति के एक निजी संपत्ति में प्रवेश कर गए, जिसके चलते अवैध घुसपैठ का मामला भी सामने आया है। प्रशासन का स्पष्ट तर्क है कि कानून-व्यवस्था को चुनौती देना अनुचित है, और इसी कारण क्राइम ब्रांच अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच की पूछताछ पर टिकीं सब की निगाहें
आज होने वाली इस उच्चस्तरीय पूछताछ पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं। जब ये तीनों नेता क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचेंगे, तो उनसे प्रदर्शन की योजना और नियमों के उल्लंघन को लेकर तीखे सवाल पूछे जाने की संभावना है। आज की पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है और पुलिस क्या सख्त कदम उठाती है।

