Delhi Pollution नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है. बुधवार, 21 अक्टूबर की सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 233 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी GRAP-1 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं.
GRAP-1 के अंतर्गत प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई तरह के एहतियाती कदम उठाए जाते हैं. इनमें धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना और कुछ गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना शामिल है. इसके साथ ही होटल और रेस्तरां में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक और डीजल जनरेटर के उपयोग पर नियंत्रण जैसे उपाय भी लागू होते हैं.
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ऐसे समय बढ़ रहा है, जब तापमान में गिरावट आने लगी है. सुबह के समय हल्की ठंड और हवा में प्रदूषक कणों की मौजूदगी के कारण वायु गुणवत्ता लोगों के लिए चिंता का विषय बन रही है.
दिल्ली में AQI 233, खराब श्रेणी में हवा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार सुबह नौ बजे दिल्ली का AQI 233 दर्ज किया गया. यह स्तर ‘खराब’ श्रेणी में आता है. इस श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से संवेदनशील लोगों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है.
AQI के जरिए हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन किया जाता है .इसका स्तर जितना अधिक होता है, वायु गुणवत्ता उतनी ही खराब मानी जाती है. दिल्ली में AQI का 200 के पार पहुंचना इस बात का संकेत है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एहतियाती कदमों की जरूरत है.
वायु प्रदूषण का असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ता है. ऐसे में खराब वायु गुणवत्ता के दौरान खुले में लंबे समय तक रहने और अधिक शारीरिक मेहनत वाली गतिविधियों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है.
GRAP-1 के तहत क्या-क्या पाबंदियां लागू होंगी?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तैयार की गई चरणबद्ध व्यवस्था है.इसके तहत हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर प्रदूषण के स्तर के अनुसार प्रतिबंध बढ़ाए जाते हैं. पहले चरण में AQI 201 से 300 के बीच रहने पर कार्रवाई की जाती है.
निर्माण स्थलों पर निगरानी: निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए तय नियमों का पालन कराना.
सड़कों की सफाई: धूल उड़ने से रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करना.
कचरा जलाने पर रोक: खुले में कचरा और अन्य अपशिष्ट जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना.
होटल-रेस्तरां में ईंधन के इस्तेमाल पर नियंत्रण: खुले भोजनालयों सहित होटल और रेस्तरां में कोयले या लकड़ी जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन के बजाय बिजली या स्वच्छ ईंधन वाले उपकरणों के इस्तेमाल को सुनिश्चित करना.
डीजल जनरेटर पर नियंत्रण: बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनरेटर के इस्तेमाल को नियंत्रित करना। निर्धारित आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं के लिए नियमानुसार छूट का प्रावधान है.
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नजर: प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना.
इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण रखना और हवा में धूल तथा अन्य प्रदूषक कणों की मात्रा को कम करना है.
प्रदूषण के बीच राजधानी में सुबह के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई.मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार को सफदरजंग मौसम केंद्र पर न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा.
दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्रों पर न्यूनतम तापमान इस प्रकार दर्ज किया गया:
| मौसम केंद्र | न्यूनतम तापमान | सामान्य से अंतर |
|---|---|---|
| सफदरजंग | 18.0°C | मौसम के औसत से कम |
| पालम | 17.8°C | 1.1°C कम |
| लोधी रोड | 17.7°C | 0.7°C अधिक |
| रिज | 19.1°C | 0.4°C कम |
| आयानगर | 17.7°C | 1.1°C कम |
तापमान के इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली के अधिकांश मौसम केंद्रों पर सुबह का न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहा. हालांकि, प्रदूषण के स्तर पर मौसम के अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, कचरा जलाने और अन्य स्थानीय स्रोतों का भी असर पड़ता है.
कितना AQI होने पर हवा को अच्छा या खराब माना जाता है?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार, AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इससे हवा की गुणवत्ता और उससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का अंदाजा लगाया जाता है.
| AQI स्तर | हवा की श्रेणी |
|---|---|
| 0–50 | अच्छा |
| 51–100 | संतोषजनक |
| 101–200 | मध्यम |
| 201–300 | खराब |
| 301–400 | बहुत खराब |
| 401–500 | गंभीर |
दिल्ली में बुधवार सुबह दर्ज किया गया 233 का AQI ‘खराब’ श्रेणी में है. यदि वायु गुणवत्ता और बिगड़ती है, तो GRAP के अगले चरणों के तहत अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, ऐसे फैसले संबंधित प्राधिकरण वायु गुणवत्ता के आंकड़ों और मौसम के पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद लेते है.
प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
खराब वायु गुणवत्ता के दौरान लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
सुबह और शाम के समय, जब स्थानीय परिस्थितियों में प्रदूषण अधिक हो, बाहर लंबे समय तक रहने से बचें.
खुले में दौड़ने या कठिन व्यायाम करने के बजाय घर के भीतर गतिविधियों को प्राथमिकता दें.
बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों का विशेष ध्यान रखें.
घर और आसपास कचरा या पत्तियां न जलाएं.
सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें.
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर रहेगी नजर
दिल्ली में AQI के 233 तक पहुंचने के बाद GRAP-1 के उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन अहम हो गया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल प्रतिबंध लागू करना पर्याप्त नहीं है; निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सड़कों की नियमित सफाई, कचरे के उचित निस्तारण और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर निगरानी भी जरूरी है.

