नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को आगामी फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' के क्लाइमैक्स सीन में महान योद्धा महाराणा प्रताप को समर्पित गीत 'शूरवीर' के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए सवाल किया, "क्या हम हिंसा का सम्मान करने की स्थिति में आ गए हैं? प्रथम दृष्टया यह निर्णय अच्छे स्वाद (Good Taste) का प्रतीक नहीं लगता।"
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ प्रशांत कुमार सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में क्या लगाए गए हैं आरोप?
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजस्थानी कलाकार 'रैपरिया बालम' द्वारा महाराणा प्रताप की वीरता और देशभक्ति के सम्मान में तैयार किया गया गीत 'शूरवीर' फिल्म में काल्पनिक गैंगस्टरों के बीच दिखाए गए अत्यधिक हिंसक दृश्यों के बैकग्राउंड में बजाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह के हिंसक चित्रण से ऐतिहासिक राष्ट्रनायक की छवि और लोक-सम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
निर्माताओं की सफाई और सीबीएफसी का रुख
सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माण कंपनी 'एक्सेल एंटरटेनमेंट' और सेंसर बोर्ड का पक्ष सामने आया:
बैकग्राउंड संगीत बदलने का प्रस्ताव: निर्माताओं के वकील ने अदालत को सूचित किया कि गाने का महाराणा प्रताप से कोई तुलनात्मक या आपत्तिजनक संबंध स्थापित करने का इरादा नहीं था। इसके बावजूद, उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष इस विवादित दृश्य से गाने को हटाकर उसकी जगह दूसरा बैकग्राउंड म्यूजिक लगाने का प्रस्ताव भेजा है।
सेंसर बोर्ड की कार्रवाई: सीबीएफसी के कानूनी प्रतिनिधि ने पीठ को आश्वासन दिया कि निर्माताओं द्वारा भेजे गए इस संशोधन प्रस्ताव पर एक सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।
हाईकोर्ट का निर्देश और अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएफसी को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह की निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माताओं के प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करे और निर्णय ले। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस विषय पर केंद्र सरकार के समक्ष भी अपना अभ्यावेदन देने की छूट दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 24 सितंबर तय की है।

