300-400 किलो पनीर की रोज सप्लाई, सफेदी के लिए वाइटनर इस्तेमाल करने का आरोप

गाजियाबाद: बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले पनीर को खरीदने का लालच आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका खुलासा गाजियाबाद जिले में हुआ है। जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नाहली गांव में अवैध रूप से पनीर तैयार करने वाली तीन फैक्टरियों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने औचक छापेमारी की, जिसमें बड़े पैमाने पर हो रही मिलावट का भंडाफोड़ हुआ है। इन फैक्टरियों में पनीर को चमकदार, सफेद और वजन में भारी बनाने के लिए कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाले वाइटनर, पामोलीन ऑयल, मिल्क पाउडर और शरीर को भारी नुकसान पहुंचाने वाले कई जहरीले केमिकल्स का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा था।

खाद्य विभाग की टीम ने बुधवार की रात को त्वरित कार्रवाई करते हुए इन तीनों फैक्टरियों से कुल 868 किलोग्राम पनीर और 170 किलोग्राम खोया मौके पर ही नष्ट करवा दिया। इसके साथ ही, वहां से विभिन्न केमिकल्स और खाद्य पदार्थों के कुल 20 नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए लखनऊ स्थित खाद्य प्रयोगशाला (लैब) में भेज दिए गए हैं।

संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज

सहायक आयुक्त खाद्य-2 सुरेश कुमार मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के इस गंभीर मामले में नाहली गांव के रहने वाले फैक्टरी संचालक कलवा, शकील और कफील के खिलाफ भोजपुर थाने में औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 123 (घातक या जहरीला पदार्थ मिलाकर देना), धारा 275 (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य या पेय पदार्थों की बिक्री करना) तथा अन्य सुसंगत गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। लखनऊ लैब से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस मामले में आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, वहीं स्थानीय पुलिस भी अपने स्तर पर मामले की गहराई से जांच कर रही है।

सामान्य जांच में असली-नकली की पहचान करना है बेहद मुश्किल

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि जिन तीन फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई है, वहां के संचालक पनीर को आकर्षक बनाने के लिए कुछ ऐसे खतरनाक रसायन खुद ही तैयार कर रहे थे जो मानव शरीर के अंगों के लिए अत्यंत विषैले हैं। इन रसायनों के प्रयोग का सबसे बड़ा जोखिम यह है कि सामान्य घरेलू या सतही तरीकों से इस नकली पनीर की पहचान करना आम आदमी के लिए लगभग असंभव हो जाता है। यह दिखने में और स्वाद के मामले में बिल्कुल असली पनीर की तरह ही प्रतीत होता है।

त्योहारों के सीजन के चलते बढ़ा दी गई थी सप्लाई

विभागीय पूछताछ के दौरान यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन तीनों फैक्टरियों से प्रतिदिन लगभग 300 से 400 किलोग्राम नकली पनीर तैयार करके त्योहारों के इस सीजन में खुले बाजार में खपाया जा रहा था। आरोपी न केवल गाजियाबाद बल्कि इसके आसपास के पड़ोसी क्षेत्रों जैसे दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) और हापुड़ में भी इस केमिकल युक्त पनीर की नियमित सप्लाई कर रहे थे।

यह मिलावटी पनीर बाजार में मात्र 200 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम की सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता था, जिसके चलते कम दाम के चक्कर में तमाम दुकानदार और आम ग्राहक इसे आसानी से खरीद लेते थे। खाद्य विभाग का कहना है कि आगामी त्योहारों के मद्देनजर नकली और मिलावटी पनीर की मांग में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए इन मिलावटखोरों ने अपने उत्पादन का दायरा भी काफी बढ़ा दिया था।

मस्तिष्क, लीवर और किडनी पर पड़ता है घातक असर

जिला स्थित एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) डॉ. चरन सिंह ने इस बारे में चेतावनी देते हुए बताया कि वाइटनर या करेक्शन फ्लूइड जैसे उत्पादों से निकलने वाली वाष्प और रसायन शरीर के लिए बेहद विषैले होते हैं। सांस के रास्ते ये जहरीले तत्व शरीर में प्रवेश करके फेफड़ों के माध्यम से अत्यंत तेजी से रक्तप्रवाह (ब्लड स्ट्रीम) में मिल जाते हैं और सीधे तौर पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

इसके लंबे समय तक सेवन से लगातार चक्कर आना, शारीरिक संतुलन या समन्वय में कमी आना, बेहोशी छा जाना, तथा यकृत (लीवर) और गुर्दे (किडनी) के फेल होने जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, इसमें इस्तेमाल होने वाले अन्य रसायन जैसे एरोसोल स्प्रे या नाइट्राइट शरीर की रक्त वाहिकाओं को असामान्य रूप से फैला देते हैं, जिससे अचानक हृदय गति तेज होना और दिल से जुड़ी गंभीर दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उन पर इन रसायनों का सबसे अधिक और बुरा असर पड़ता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि वे हमेशा भरोसेमंद ब्रांडेड और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSAI) से लाइसेंस प्राप्त पंजीकृत दुकानों से ही डेयरी उत्पादों की खरीदारी करें। चंद रुपयों की बचत के चक्कर में अपने और अपने परिवार की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करें। विभाग ने यह भी घोषणा की है कि आने वाले दिनों में जिलेभर में मिठाई और दूध-पनीर से जुड़े डेयरी उत्पादों का निर्माण करने वाली इकाइयों की सघन जांच के लिए विशेष अभियान लगातार चलाया जाएगा।

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