नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद का मानसून सत्र संपन्न हो गया है, लेकिन सत्र के अंतिम दिन यानी गुरुवार को संसद परिसर में जो सियासी ड्रामा देखने को मिला, वह अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से ठीक पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। इस दौरान कांग्रेस के प्रमुख नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने हाथों में खिलौना बंदर लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और '56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर' जैसे तीखे नारे लगाए।
मकर द्वार पर दिखा सत्ता पक्ष और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
संसद के अंतिम दिन सदन के भीतर के कामकाज से ज्यादा बाहर का राजनीतिक माहौल सुर्खियों में रहा। संसद भवन के मकर द्वार की सीढ़ियों पर सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके जवाब में विपक्षी दलों के सांसद भी आक्रामक तेवर के साथ सामने आ गए। इसी गहमागहमी के बीच पवन खेड़ा और उनके साथ मौजूद अन्य सांसद खिलौना बंदर थामे हुए नजर आए, जिसने वहां मौजूद सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
नारे के जरिए सियासी तंज
विपक्ष का यह अनोखा प्रदर्शन महज एक राजनीतिक नौटंकी नहीं था, बल्कि इसके जरिए सरकार पर सीधा और तीखा तंज कसा गया था। '56 इंच' का यह संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े उस चर्चित राजनीतिक जुमले की याद दिलाता है, जिसका उपयोग पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने सियासी बयानों में करते आए हैं। विपक्ष ने इसी प्रतीकात्मक अंदाज का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। इस अनोखे प्रदर्शन और लगाए गए नारों ने संसद परिसर की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया।
सत्र भले ही समाप्त, लेकिन राजनीतिक टकराव जारी
संपूर्ण मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय और नीतिगत मुद्दों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी तनातनी देखने को मिली। हंगामे और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही कई अवसरों पर बाधित हुई। सत्र के अंतिम दिन भी दोनों पक्षों के शक्ति प्रदर्शन ने माहौल को गर्म बनाए रखा।
विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के महत्वपूर्ण और जरूरी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने से बचती रही है। इसके विपरीत, सत्ता पक्ष का यह रुख रहा कि विपक्ष बिना किसी ठोस वजह के लगातार हंगामा कर रहा है और सदन की कार्यवाही को चलने नहीं दे रहा है।
सदन स्थगित, पर सियासत का दौर रहेगा जारी
लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ ही मानसून सत्र का आधिकारिक समापन हो गया है, लेकिन संसद के बाहर हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता और विपक्ष के बीच की यह राजनीतिक जंग अभी थमने वाली नहीं है। सदन की कार्यवाही भले ही थम गई हो, लेकिन अंतिम दिन की यह तस्वीरें, नारे और 'खिलौना बंदर' वाला यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में राजनीतिक बहसों और सोशल मीडिया पर छाया रहेगा।

