Bastar Women with Disabilities जगदलपुर/बस्तर: भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच बस्तर ब्लॉक के जामगुड़ा गाँव से एक हृदयविदारक दृश्य सामने आया है. यहाँ की निवासी दुलमा कश्यप, जो शारीरिक रूप से चलने-फिरने में अक्षम हैं, उन्हें अपनी प्यास बुझाने के लिए रोज जान जोखिम में डालनी पड़ रही है. वायरल वीडियो में दुलमा को सिर पर बर्तन रखे, घुटनों के बल रेंगते हुए व्यस्त सड़क पार करते देखा जा सकता है.
सुशासन वाली अमानवीय साय सरकार की नाकामी का आईना!
बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड जामगुड़ा में दिव्यांग महिला घिसटते हुए पानी ढोने को मजबूर… हर कदम उसकी पीड़ा, पूरी व्यवस्था की सच्चाई बयान कर रही है। pic.twitter.com/XbeOmlc8Rx
— INC Chhattisgarh (@INCChhattisgarh) April 28, 2026
Bastar : सूखी टंकी और अधूरे वादे
जामगुड़ा गाँव में विकास के नाम पर एक ऊंची पेयजल टंकी तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन पाइपलाइन और नल कनेक्शन न होने के कारण यह वर्षों से सूखी पड़ी है। सरकार के ‘नल से जल’ पहुँचाने के वादे इस गाँव में आकर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। गाँव में कहने को तो सात हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर खराब हैं या पानी नहीं दे रहे। मजबूरन दुलमा को 200 मीटर दूर स्थित एक निजी बोरवेल से पानी लाना पड़ता है।
संसाधनों का अभाव और प्रशासनिक उदासीनता
दुलमा कश्यप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव और इच्छापुर से पूरी की है, लेकिन आज उनकी जिंदगी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष में बीत रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें पूर्व में जो ई-ट्राइसाइकिल (बैटरी चलित वाहन) दी गई थी, वह अब खराब हो चुकी है। संसाधनों और जानकारी की कमी के कारण वे इसे सुधरवाने के लिए जिला मुख्यालय तक नहीं पहुँच पा रही हैं और पंचायत स्तर पर भी उन्हें कोई विशेष सहायता नहीं मिल रही है।
क्या यही है अंतिम व्यक्ति तक विकास?
यह स्थिति प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे शहरों में बैठने वाले अधिकारियों के लिए जामगुड़ा की यह तस्वीर एक आईना है। जब एक दिव्यांग नागरिक को पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए सड़क पर घुटनों के बल रेंगना पड़े, तो ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास’ के नारे खोखले साबित होते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि जल जीवन मिशन के तहत बंद पड़े कनेक्शनों को तुरंत शुरू किया जाए और दुलमा जैसी जरूरतमंद महिलाओं को तत्काल प्रभाव से सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। कोंडागांव और दंतेवाड़ा जैसे पड़ोसी जिलों में भी ऐसी ही समस्याओं की खबरें अक्सर आती रहती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

