भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, रूस सैंक्शन बिल सीनेट में पास; क्या है पूरा मामला?

Trump 100 percent tariffs नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े एक कड़े प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके चलते भारत जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो रूस से रियायती दरों पर क्रूड ऑयल का आयात करते हैं. अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन में भारी बहुमत से पारित हुए इस बिल का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाना है, जो रूसी ऊर्जा उत्पादों के व्यापार से जुड़े हुए हैं. भारत के साथ-साथ इस सख्त कानून के दायरे में चीन भी प्रमुखता से शामिल है.

Trump 100 percent tariffs : ट्रंप को मिलेगा 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का विशेष अधिकार, हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में होगी पेशी

‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ नामक यह महत्वपूर्ण विधेयक सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोटों से पारित हुआ है. इस कानून के लागू होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड उन पांच प्रमुख देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए अधिकृत हो जाएंगे, जो रूस से तेल और प्राकृतिक गैस का आयात कर रहे हैं. अब इस बिल को मंजूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश किया जाएगा, जिस पर आगामी 31 अगस्त को होने वाली बैठक में विचार किया जा सकता है.

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश बने हैं मुख्य आयातक

बीते चार साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन उनका अपेक्षित असर नहीं दिखा. वर्तमान में रूस से सबसे अधिक मात्रा में कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया के नाम शामिल हैं. अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि रियायती तेल बेचकर रूस इस कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को जारी रखने के लिए कर रहा है.

जुलाई में भारत का रूस से क्रूड आयात बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 27.8 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) पहुंच गया है, जो जून के मुकाबले डेढ़ प्रतिशत अधिक है. इस समय भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूस से आयात बढ़ाया है, ऐसे में अमेरिका का यह नया विधायी कदम भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.

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