नई दिल्ली। त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में चीनी की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, टैरिफ रेट कोटा के तहत दस लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अंतिम तिथि को बढ़ाकर इकतीस दिसंबर दो हजार छब्बीस कर दिया गया है। इससे पूर्व सरकार ने बीस अगस्त को यह अनुमति इकतीस अक्टूबर तक के लिए प्रदान की थी, किंतु उत्पादन अनुमानों में आई गिरावट के मद्देनजर घरेलू आपूर्ति को मजबूत रखने के लिए इस अवधि में विस्तार किया गया है।
शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा बढ़ाने के मुख्य कारण
देश में आगामी पर्वों और त्योहारी दौर के दौरान चीनी की मांग में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, जिसके लिए पर्याप्त बफर स्टॉक का होना आवश्यक है। यद्यपि सरकार ने पूर्व में दस लाख टन चीनी के बिना सीमा शुल्क आयात को मंजूरी दी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों में मूल्य समानता न होने के कारण अब तक केवल लगभग दो लाख साठ हजार टन कच्चे चीनी का ही आयात हो पाया है। उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, आयात की इस सुस्त गति को गति देने और वैश्विक बाजारों में कीमतों के अनुकूल होने पर कारोबारियों को तुरंत खेप मंगाने का अवसर देने के उद्देश्य से ही वित्त मंत्रालय ने आयात खिड़की को दो महीने आगे बढ़ाया है।
उत्पादन का संशोधित अनुमान और घरेलू मांग का संतुलन
अक्तूबर से सितंबर तक चलने वाले विपणन वर्ष के लिए देश में चीनी उत्पादन के शुरुआती अनुमानों में संशोधन करना पड़ा है। पहले जहां उत्पादन $343$ लाख टन रहने का अनुमान था, वहीं ताजा आकलन के अनुसार अब यह घटकर $306$ लाख टन रहने की संभावना जताई गई है। इसके मुकाबले भारत में वार्षिक घरेलू खपत लगभग $280$ से $285$ लाख टन के बीच है। हालांकि यह उत्पादन मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, फिर भी त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की कृत्रिम किल्लत या जमाखोरी को रोकने तथा कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा तय करने के साथ-साथ आयात के इस विकल्प को पूरी तरह खुला रखा है।

