Railway Safety पर CAG की चिंता, 20 हजार से ज्यादा परियोजनाएं अधूरी

नई दिल्ली: संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट और देश-दुनिया से जुड़ी प्रमुख आर्थिक खबरों में भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर बड़े कॉरपोरेट सौदों तक की कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इन रिपोर्ट्स में रेलवे के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए जाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी घटनाएं शामिल हैं।

 रेलवे की सुरक्षा परियोजनाओं में देरी और फंड आवंटन पर कैग की कड़ी आपत्ति

कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जहां वर्ष 2024-25 के दौरान सुरक्षा से जुड़ी कुल 20,304 परियोजनाएं अधूरी पड़ी रहीं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि रेलवे ने राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (आरआरएसके) के तहत पांच वर्षों में तय 25,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 5,324.62 करोड़ रुपये यानी मात्र 21.30 प्रतिशत राशि ही दी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच इस कोष की 3,397.60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल गैर-प्राथमिकता वाले कार्यों में कर दिया गया। रिपोर्ट में 19,458.25 करोड़ रुपये के बिना मंजूरी खर्च का भी जिक्र किया गया है, जबकि वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 5,32,378.43 करोड़ रुपये और सकल यातायात आय 2,65,113.61 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जिससे शुद्ध अधिशेष घटकर 2,660.28 करोड़ रुपये पर आ गया।

टीपीजी और टेमासेक ने बेची डॉ. अग्रवाल हेल्थ केयर में हिस्सेदारी

प्रमुख निवेश फर्मों टीपीजी और टेमासेक ने खुले बाजार में एक बड़े सौदे के तहत चेन्नई स्थित नेत्र देखभाल श्रृंखला डॉ. अग्रवाल हेल्थ केयर में अपनी 13 फीसदी यानी 12.64 प्रतिशत हिस्सेदारी 2,008 करोड़ रुपये में बेच दी है। इतनी बड़ी मात्रा में शेयर बेचने के बावजूद ये दोनों फर्में कंपनी की सबसे बड़ी सार्वजनिक शेयरधारक बनी हुई हैं। इस हिस्सेदारी के एक हिस्से को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, इन्वेस्को म्यूचुअल फंड, पोलर कैपिटल और एलायंस जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने लगभग 5 फीसदी यानी कुल 761.60 करोड़ रुपये में खरीदा। हालांकि इस बिकवाली के बाद कंपनी के शेयरों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 511 रुपये पर बंद हुआ, जो कि कंपनी के उस मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बीच आया जिसमें Q1FY27 के दौरान कर के बाद समेकित लाभ 44.6 फीसदी बढ़कर 55.02 करोड़ रुपये और राजस्व 26 फीसदी उछलकर 614.02 करोड़ रुपये हो गया था।

 भारत और पांच अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार समझौते का नया रास्ता

भारत और दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के बीच द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिसके तहत दोनों पक्षों ने वस्तुओं के लिए तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) की बातचीत शुरू करने की शर्तों को अंतिम रूप दे दिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में मुख्य वार्ताकारों ने इस रोडमैप पर हस्ताक्षर किए। इस समूह के पांच सदस्य देशों में बोत्सवाना, एस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इस समझौते का उद्देश्य चुनिंदा वस्तुओं पर एक-दूसरे को शुल्क में छूट देना है, हालांकि इसमें सेवाओं का व्यापार शामिल नहीं होगा। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 15.56 अरब डॉलर दर्ज किया गया था, और इस समझौते से अफ्रीकी क्षेत्र के साथ व्यापारिक सहयोग के और अधिक प्रगाढ़ होने की पूरी उम्मीद है।

 कैग रिपोर्ट: सेबी के नियमों की अनदेखी पर सीपी एसईएस के खिलाफ नहीं कटे अंक

कैग की एक अन्य रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के कामकाज को लेकर भी बड़े खुलासे हुए हैं, जिसके मुताबिक प्रशासनिक मंत्रालयों और सार्वजनिक उद्यम विभाग ने उन सीपी एसईएस के समझौता ज्ञापन (MoU) स्कोर से अंक नहीं काटे जिन्होंने सेबी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया था। 31 मार्च 2024 तक की गई इस समीक्षा में 65 सूचीबद्ध सीपी एसईएस और 36 ऐसे निगम शामिल थे जिनके बॉन्ड या डिबेंचर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि सात सीपी एसईएस में गैर-कार्यकारी निदेशकों की संख्या बोर्ड के 50 प्रतिशत से कम थी, 49 संस्थानों में आवश्यक संख्या में स्वतंत्र निदेशक नहीं थे, और कई उद्यमों के बोर्ड में महिला निदेशकों का पूरी तरह अभाव पाया गया, जिसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई दंडात्मक या अंक कटौती की कार्रवाई नहीं की गई।

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