BHU National Centre for Ageing वाराणसी : वाराणसी में बुजुर्गों के लिए बन मेगा सुपर स्पेशियलिटी हास्टिपल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है. जल्दी ही इसका लोकार्पण होगा. यहां चल रहे निर्माण कार्य का जायजा लेने खुद सीएम योगी शनिवार को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर पहुंचे . सीएम योगी ने ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ के निर्माण का खुद स्थलीय निरीक्षण किया. लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र बुजुर्गों को समर्पित होगा और उत्तर भारत में जरा (वृद्धावस्था) चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में स्थापित होगा.

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से परियोजना को पूरा करने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए और सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं.
BHU National Centre for Ageing:युद्धस्तर पर पूरा होगा निर्माण कार्य
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने बीएचयू प्रशासन को भी परियोजना की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना बुजुर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इसलिए इसकी गुणवत्ता और समयसीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
देश का तीसरा और उत्तर भारत का प्रमुख जरा चिकित्सा केंद्र
बीएचयू में बन रहा यह सात मंजिला ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ देश का तीसरा तथा उत्तर भारत का प्रमुख जेरिएट्रिक चिकित्सा केंद्र होगा. परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इसे आम लोगों के लिए शुरू किए जाने की संभावना है.
केंद्र के शुरू होने के बाद पूर्वांचल समेत उत्तर भारत के लाखों बुजुर्ग मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
बुजुर्गों के लिए होंगी विशेष चिकित्सा सुविधाएं
नेशनल सेंटर फॉर एजिंग में वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं. यहां मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक ओपीडी संचालित होगी, जहां बुजुर्ग मरीजों को विभिन्न रोगों के लिए विशेषज्ञ परामर्श और उपचार मिलेगा.
इसके अलावा केंद्र में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध होंगी—
- मेमोरी क्लीनिक
- गठिया (अर्थराइटिस) क्लीनिक
- जेरिएट्रिक रोग विशेषज्ञ सेवाएं
- पुनर्वास सेवाएं
- डे-केयर सेंटर
- आधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं
इन सुविधाओं का उद्देश्य वृद्धावस्था से जुड़ी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का समग्र समाधान प्रदान करना है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा केंद्र
निर्माणाधीन संस्थान में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। यहां मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए कई उन्नत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
केंद्र में शामिल प्रमुख सुविधाएं होंगी—
- 200 बेड की क्षमता
- मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर
- अत्याधुनिक रेडियोलॉजी यूनिट
- आईसीयू सुविधा
- निजी वार्ड
- उन्नत पैथोलॉजी एवं जांच केंद्र
इन व्यवस्थाओं के माध्यम से बुजुर्ग मरीजों को एक ही छत के नीचे संपूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
चिकित्सा शिक्षा और शोध को मिलेगा बढ़ावा
नेशनल सेंटर फॉर एजिंग केवल इलाज का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि जरा चिकित्सा शिक्षा और शोध का भी महत्वपूर्ण संस्थान बनेगा. यहां डॉक्टरों और नर्सों को बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
संस्थान में जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग के अंतर्गत वरिष्ठ चिकित्सकों और सीनियर रेजिडेंट की संख्या बढ़ाई जाएगी, साथ ही एमडी जेरिएट्रिक मेडिसिन की स्नातकोत्तर सीटों में भी वृद्धि की जाएगी.
वृद्धावस्था रोगों पर होगा विशेष अनुसंधान
इस सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में वृद्धावस्था से संबंधित रोगों पर व्यापक अनुसंधान किया जाएगा. यहां नई उपचार पद्धतियों का विकास, बुजुर्ग मरीजों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का अध्ययन और विशेष चिकित्सा दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए ऐसे संस्थानों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है. यह केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
पूर्वांचल के लाखों बुजुर्गों को होगा लाभ
नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के संचालन में आने के बाद पूर्वांचल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के राज्यों के लाखों बुजुर्ग मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी. उन्हें वृद्धावस्था से संबंधित जटिल बीमारियों के उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा.
यह परियोजना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि बीएचयू को जरा चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी दिलाएगी.

