Neeraj Chorpa Silver Medal : ‘गऱ मांए दुनिया चला रही होती ,तो दुनिया की शक्ल कितनी अच्छी होती….

Neeraj Chorpa Silver Medal , नई दिल्ली : ओलंपिक के जैवलिन थ्रो मुकाबले में गुरुवार 8 अगस्त को भारत के गोल्डन ब्याय नीरज चोपड़ा का  मुकाबला पाकिस्तान के अरशद नदीम से हुआ. दोनो स्वर्ण पदक के दावेदार थे. नीरज चोपड़ा को लेकर ज्यादा उम्मीदे थी क्योंकि इससे पहले नीरज गोल्ड मेडल जीच चुके हैं. इस गेम का उनका अनुभव दूसरे खिलाडियों से कुछ ज्यादा था लेकिन भारत के नीरज चोपड़ा केवल कुछ सेंटीमीटर से पीछे रह गये और पाकिस्तान के नदीम अरशद ने 92.97 मीटर भाल फेंक कर सोना अपने नाम कर लिया. नीरज चोपड़ा 89.45 मीटर भाला फेंक पाये.

Neeraj Chorpa Silver Medal : भारत के झंडे के साथ खड़े हो गये अरशद नदीम 

पेरिस के ओलंपिक मैदान का ये दृश्य  भावुक कर देने वाला है . मैदान में नीरज चोपड़ा सिल्वर मेडल के साथ अपने देश का झंडा लेकर खड़े थे और फोटोग्राफर्स तस्वीरें ले रहे थे, तभी नीरज चोपड़ा ने बुलाया और नदीम एकदम से आकर नीरज के पास खड़े हो गये. इस दृश्य को देखकर आप क्या कहैंगे. इन खिलाडियों ने दिखा दिया कि खिलाड़ियो के लिए देश और सरहद कोई सीमा नही है, बस दिल बड़ा होना चाहिये.

 

नीरज और नदीम की मां ने कहा – मेडल कोई भी जीते , वो दोनों के लिए खुश हैं   

अक्सर ये होता है कि भारत का कोई खिलाड़ी जब पाकिस्तान के खिलाड़ी को मात देता है या पाकिस्तान का कोई खिलाड़ी भारत के किसी खिलाड़ी को हाराता है तो दोनों देश में एक दूसरे के खिलाफ जहरीले शब्दों के बाण चलने शुरु हो जाते हैं. जिसके दिल मे जितनी भड़ास होती है लोग निकाल देते हैं  लेकिन इस बार इस ओलंपिक में जीते मेडल के जश्न की बागोडर खिलाडियों की मांओं ने थाम ली है और अब जो नजारा देखने के लिए मिल रहा है उसके बारे में दोनों देश के आम कट्टरवादी लोग सोच भी नहीं सकते हैं.
सिल्वर मेडल पाने वाले नीरज चोपड़ा की मां कह रही है कि कोई बात नहीं उनके बेटे ने सिल्वर जीता वो भी किसी गोल्ड से कम नहीं हैं. वो नदीम के लिए भी खुश है. कह रही हैं नदीम भी उनके बेटे की ही तरह है

 

वहीं पाकिस्तान में नदीन की मां कह रही है कि उनके लिए नारज और नदीम दोनो बेटे की तरह है. दोनो दोस्त हैं . नीरज गोल्ड जीते या नदीम एक ही बात है. नदीम के मां ने कहा  “नीरज भी मेरा बेटा है.अल्लाहताला उसे भी कामयाब करे.वो अरशद का भाई भी है, दोस्त भी है”

जरा सोचिये इन माओं का दिल कितना बड़ा है. यहां कोई इस बात की क्रेडिट नहीं ले रहा है कि मैंने अपने बेटे को ये खिलाया ये पिलाया, उसपर इतने लाख खर्च किये , ये मेरी इसकी जीत तो मेरी जीत है.पाकिस्तान के बेटे ने हिंदुस्तान के बेटे को पीछे छोड़ दिया. यहां ऐसा कोई उतावलापन नहीं दिख रहा है. शायद यही खेल की सबसे बड़ी भावना है. जहां कोई कड़वाहट नहीं है, बस एक खिलाड़ी की जीत है, जिसमें सब जश्न  मनाने का हकदार हैं.इन दोनो हीरों की मांओं ने  उन दिग्गजों को आइना दिखा दिया है जो देश, धर्म और अहंकार के नाम पर खिलाडियों के भविष्य को कुचलने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं.

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