India-US deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड बातचीत अभी भी जारी है. हलांकि इस बीच दोनों देशों के बीच संभावित डील क्यों नहीं हो पा रही है इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक करीबी सहयोगी ने एक बड़ा दावा किया. US कॉमर्स सेक्रेटरी लुटनिक ने दावा किया कि, PM मोदी के ट्रंप को कॉल न करने की वजह से इंडिया ट्रेड डील नहीं हुई.
मोदी ट्रंप को फोन करने में अनकम्फर्टेबल थे- US कॉमर्स सेक्रेटरी लुटनिक
लटनिक ने एंटरप्रेन्योर चमाथ पालिहापिटिया के साथ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में बातचीत को याद करते हुए कहा, “मैंने डील तय की थी. लेकिन आपको मोदी को प्रेसिडेंट ट्रंप को कॉल करवाना था. वे (इंडिया) इससे अनकम्फर्टेबल थे. इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया.”
लटनिक ने बाद में कहा कि भारत और अमेरिका एक डील को फाइनल करने के बहुत करीब थे, लेकिन नई दिल्ली “सी-सॉ के गलत तरफ” थी.
लटनिक ने यह भी कहा कि अमेरिका ने आने वाले हफ़्ते में इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के साथ कई डील कीं, लेकिन भारत के साथ वाली डील तो उससे भी पहले होने वाली थी. लटनिक ने कहा, “भारत की (डील) उनसे (दूसरे देशों से) पहले होने वाली थी. मैंने उनके साथ ज़्यादा रेट पर बातचीत की थी.”
ट्रंप के सहयोगी की यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अगर भारत ने “रूसी तेल मुद्दे” पर मदद नहीं की, तो वह भारत पर मौजूदा टैरिफ बढ़ा देंगे.
ट्रंप ने हाल ही में कहा था, “भारत मुझे खुश करना चाहता था. मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं और उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था. और मुझे खुश करना ज़रूरी था. हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.”
India-US deal: 50% टैरिफ और भारत का ‘कोई डेडलाइन नहीं’ वाला रुख
अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली के मॉस्को के साथ तेल व्यापार का हवाला देते हुए भारत पर 50% टैरिफ लगाया था. तब से अमेरिकी प्रशासन इन भारी ड्यूटी का इस्तेमाल करके भारत को रूस के साथ एनर्जी ट्रेड रोकने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है.
हालांकि, भारत ने हमेशा यह कहा है कि उसके एनर्जी डील बाज़ार में मिलने वाली चीज़ों और भारतीय कंज्यूमर की ज़रूरतों के हिसाब से तय होते हैं. अक्टूबर में, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी साफ किया था कि कुछ समय के दबाव में कोई डील करने का सवाल ही नहीं उठता.
गोयल ने कहा कि भारत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन डेडलाइन के लिए नहीं. उन्होंने कहा था, “हम बेशक यूनाइटेड स्टेट्स से बात कर रहे हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में डील नहीं करते, और हम डेडलाइन या सिर पर बंदूक रखकर डील नहीं करते.”
क्या भारत को 500% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा?
भारत के लिए एक बड़ा टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने हाल ही में दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर बैन लगाने वाले बिल को मंज़ूरी दे दी है. यह बिल न सिर्फ मॉस्को पर बल्कि भारत समेत उसके ट्रेड पार्टनर्स पर भी बैन बढ़ाने का प्रस्ताव देता है.
‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ़ 2025’ के तहत, ट्रंप को “उन सभी देशों से अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर टैरिफ “कम से कम 500 प्रतिशत” तक बढ़ाना होगा, जो जानबूझकर रूसी मूल के यूरेनियम और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का लेन-देन करते हैं”.
इस बिल का मकसद मॉस्को के ट्रेडिंग पार्टनर्स को भारी ड्यूटी लगाने की धमकी देकर रूस पर दबाव डालना है ताकि वह यूक्रेन में अपना हमला रोक दे.
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