उत्तराखंड SIR में नया बवाल,कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद के नाम पर आपत्ति; कोर्ट जाने की तैयारी

Uttarakhand SIR  देहरादून : उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. ताजा मामला हरिद्वार जिले की पिरान कलियर से हैं. यहां से  कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद  का ही नाम  मतदाता सूची से हटा दिया गया है. चुनाव आयोग के इस कदम के खिलाफ आपत्ति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है. कांग्रेस विधायक ने इस मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.

मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने इसे लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी ने कहा है कि यदि निर्वाचन आयोग और प्रशासन की ओर से मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी.

Uttarakhand SIR :फुरकान अहमद के नाम पर किसने दर्ज कराई आपत्ति?

देहरादून स्थित कांग्रेस भवन पहुंचे विधायक फुरकान अहमद ने दावा किया कि वह पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 126 के पंजीकृत मतदाता है. उनके मुताबिक, मतदाता सूची से उनका नाम हटाने के लिए मोहम्मद फुरकान नाम के व्यक्ति की ओर से फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज कराई गई.

फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने या नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है. विधायक के नाम पर आपत्ति दर्ज होने के बाद उन्होंने संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया.

आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने ही किया इनकार

विधायक फुरकान अहमद के मुताबिक, जब उन्होंने उस व्यक्ति से संपर्क किया, तो उसने उनके नाम पर आपत्ति दाखिल करने से साफ इनकार कर दिया.

विधायक का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने अपनी बात की पुष्टि के लिए शपथ पत्र भी तैयार किया और उसे जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया है. इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया के दौरान दाखिल की जा रही आपत्तियों की सत्यता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं.

हालांकि, इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अंतिम रूप से क्या तथ्य सामने आते हैं, यह जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा.

फुरकान अहमद का दावा- क्षेत्र में 1700 से ज्यादा आपत्तियां

कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद ने दावा किया कि अकेले उनके विधानसभा क्षेत्र में 1,700 से अधिक आपत्तियां दर्ज की गई हैं. उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में आपत्तियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं और कई मामलों में लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत सामने आ रही है.

विधायक ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित विधायक के नाम को हटाने के लिए इस तरह आपत्ति दर्ज हो सकती है, तो आम मतदाताओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

कांग्रेस ने मांग की है कि SIR के दौरान दाखिल सभी आपत्तियों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और यदि किसी व्यक्ति की पहचान या नाम का गलत इस्तेमाल कर आपत्ति दर्ज कराई गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो.

कांग्रेस का भाजपा पर गंभीर आरोप

इस पूरे मामले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल सत्ता के बल पर ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है, जो लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं.

हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है. ऐसे में कांग्रेस के आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दल के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

एक व्यक्ति के नाम से कई आपत्तियों का भी दावा

गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल करके 50 से अधिक आपत्तियां दाखिल किए जाने के मामले भी सामने आए हैं. कांग्रेस का कहना है कि यदि इस तरह की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग और प्रशासन को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए. उनका कहना है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाएगी.

कोर्ट जाने की तैयारी में कांग्रेस

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रखेगी. पार्टी का कहना है कि यदि निर्वाचन आयोग और प्रशासन की ओर से कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की गई तो अदालत का रुख किया जाएगा.

SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियों की प्रक्रिया को लेकर उत्तराखंड में आने वाले दिनों में राजनीतिक विवाद और बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर किसी निर्वाचित विधायक के नाम पर आपत्ति दर्ज होने के मामले ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है.

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