Uttarakhand Homestay Scheme देहरादून:उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार होम स्टे योजनाओं पर जोर दे रही है. सरकार के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए स्थानीय लोगों को अपने गांवों में ही स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं और रिवर्स पलायन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है.

दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत बीते चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को 79 करोड़ 28 लाख 18 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है. योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आवासीय पर्यटन सुविधाओं का विकास करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है.
Uttarakhand Homestay Scheme:537 लाभार्थियों को मिली आर्थिक सहायता
दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सब्सिडी प्रावधान किए गए हैं.
कुल लाभार्थी – 537
कुल सब्सिडी- ₹79.28 करोड़
मैदानी क्षेत्र के परियोजना लागत का 25% तक, अधिकतम ₹7.50 लाख।
सरकार के अनुसार, यह सहायता होम स्टे के निर्माण के लिए प्रदान की जाती है। सब्सिडी की राशि निर्धारित पात्रता और योजना के नियमों के अनुसार दी जाती है।
युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर
उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पलायन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है. होम स्टे व्यवसाय स्थानीय निवासियों को पर्यटकों के आवास, भोजन और स्थानीय अनुभवों से जुड़ी सेवाएं प्रदान करने का अवसर देता है.
सरकारी जानकारी के मुताबिक, राज्य में लगभग 6,500 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं.इनमें 22 फीसदी से अधिक प्रवासियों ने होम स्टे व्यवसाय अपनाया है.
इससे गांवों में पर्यटकों की आवाजाही के साथ स्थानीय दुकानों, परिवहन, खानपान और अन्य सेवाओं को भी संभावित लाभ मिल सकता है. हालांकि, रोजगार और आय पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए लाभार्थियों की आय, रोजगार सृजन और होम स्टे के संचालन से जुड़े आंकड़ों की अलग से समीक्षा जरूरी होगी.
सारी गांव बना ग्रामीण पर्यटन का उदाहरण
रुद्रप्रयाग जिले का सारी गांव होम स्टे आधारित पर्यटन के उदाहरण के तौर पर सामने आया है. यहां 40 से अधिक होम स्टे संचालित होने की जानकारी दी गई है.
गांव में ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों के लिए आने वाले पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिलती है. होम स्टे कारोबार से स्थानीय लोगों को पर्यटकों की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित करने का अवसर मिलता है.
सारी गांव जैसे क्षेत्रों में होम स्टे और प्राकृतिक पर्यटन के बीच समन्वय ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है.
उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के निकट स्थित जादुंग गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में है.
जादुंग और नेलांग गांवों को 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक कारणों से खाली कराया गया था. अब दोनों गांव केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में शामिल हैं.
होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकास से सीमांत क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सक्रिय करने की संभावना है. ऐसे क्षेत्रों में पर्यटन विकास के साथ सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होगा.
ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर योजना से 258 लोग लाभान्वित
सरकार ने ‘मेरी योजना मेरी सरकार’ कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना लागू की है. इसका उद्देश्य पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है.
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत पिछले चार वर्षों में 258 पात्र लोगों को लाभ मिला है.
यह योजना उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है जहां ट्रेकिंग रूट, प्राकृतिक स्थल और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों के कारण पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है.
होम स्टे योजना के लिए कौन पात्र है?
दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना से जुड़ी प्रमुख पात्रता और आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार बताई गई है:
योजना पूरे उत्तराखंड में लागू है, लेकिन नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.
उत्तराखंड के मूल निवासी योजना का लाभ लेने के लिए पात्र हैं.
नए होम स्टे के निर्माण या पुराने भवन के नवीनीकरण के बाद पर्यटन विकास परिषद में पंजीकरण अनिवार्य है.
आवेदन उत्तराखंड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है.
जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति में आवेदक के साक्षात्कार और प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद ऋण स्वीकृति के लिए आवेदन बैंक भेजा जाता है.
आवेदन करने से पहले पात्रता, दस्तावेजों, सब्सिडी और बैंक ऋण से जुड़े नवीनतम नियमों की आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है.
धामी सरकार का ग्रामीण पर्यटन पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, गांवों की खुशहाली प्रदेश और देश की समृद्धि से जुड़ी है. सरकार पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाने और स्थानीय लोगों को होम स्टे व्यवसाय से जोड़ने पर जोर दे रही है.
होम स्टे नीति के जरिए रोजगार, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जा रहा है. इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने होम स्टे नियमित रूप से संचालित होते हैं, स्थानीय लोगों की आय कितनी बढ़ती है और पर्यटन विकास से गांवों को कितना स्थायी लाभ मिलता है.

