60 हजार शिक्षक भर्ती की मांग पर प्रयागराज में घमासान,अखिलेश बोले अनडेमोक्रेटिक है ये सरकार

UP Teacher Recruitment प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों का इंतजार अब आंदोलन में बदल चुका है. प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए 60 हजार पदों पर विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर प्रयागराज के पत्थर गिरजाघर धरना स्थल पर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लगातार जारी है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि लंबे समय से भर्ती नहीं होने के कारण हजारों-लाखों योग्य युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने खुद  रिक्त पदों के बारे में  जानकारी दी है, इसके बावजूद व्यापक स्तर पर भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा रहा है. इसी मुद्दे को लेकर 10 सितंबर को प्रयागराज में महाधरने का भी आह्वान किया गया है.

UP Teacher Recruitment:विधानसभा में आया 60,958 रिक्त पदों का आंकड़ा

शिक्षक भर्ती आंदोलन के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उत्तर प्रदेश विधानसभा में सरकार की ओर से दिया गया जवाब है. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 3,27,804 स्वीकृत सहायक अध्यापक पदों के मुकाबले 60,958 पद रिक्त हैं.

यानी अभ्यर्थियों की 60 हजार पदों पर भर्ती की मांग पूरी तरह हवा में नहीं है. विधानसभा में सरकार की ओर से रिक्तियों का आंकड़ा सामने आने के बाद आंदोलनकारी अभ्यर्थी इन पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. रिक्त पदों की संख्या और तत्काल जारी होने वाले भर्ती विज्ञापन में शामिल पदों की संख्या एक समान होना जरूरी नहीं है. पदों की स्थिति, आरक्षण, जिलावार आवश्यकता, पदों का अधियाचन और भर्ती नियमों के अनुसार अंतिम संख्या तय होती है.

60 हजार की जगह अभी 11,508 पदों का अधियाचन

सरकार की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 17 मई 2026 को शिक्षा निदेशक (बेसिक) की ओर से 11,508 नगर क्षेत्र के सहायक अध्यापक पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया था.

यही बात आंदोलन को और ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है. अभ्यर्थी चाहते हैं कि केवल सीमित संख्या में नहीं, बल्कि उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर व्यापक भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए. जून में भी शिक्षक भर्ती को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी कि ई-अधियाचन पोर्टल के जरिए जिलों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खाली पदों का ब्योरा जुटाया जा रहा है.

आठ साल से भर्ती का इंतजार, अभ्यर्थियों में बढ़ रहा आक्रोश

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती का इंतजार इतना लंबा हो चुका है कि कई उम्मीदवारों की उम्र भर्ती की अधिकतम सीमा के करीब पहुंच रही है. जिन युवाओं ने D.El.Ed, TET, CTET और दूसरी जरूरी योग्यताएं हासिल कर रखी हैं, वे लगातार नई भर्ती का इंतजार कर रहे हैं.

प्रयागराज में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दावा है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के विज्ञापन का इंतजार करीब आठ वर्षों से किया जा रहा है. 5 सितंबर से 60 हजार सहायक अध्यापक पदों की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू होने की भी रिपोर्ट सामने आई थी.

आंदोलनकारियों का कहना है कि नौकरी की तैयारी में युवाओं के कई साल निकल रहे हैं. ऐसे में सरकार को रिक्तियों की समीक्षा कर जल्द से जल्द भर्ती कैलेंडर और विज्ञापन जारी करना चाहिए.

बच्चों को साथ लेकर धरने पर पहुंच रहीं महिला अभ्यर्थी

इस आंदोलन की तस्वीर का एक मानवीय पहलू भी सामने आया है. कई महिला अभ्यर्थी अपने छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर पहुंच रही हैं. कड़ी धूप और तमाम परेशानियों के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं.

इन अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का अवसर चाहती हैं. उनका सवाल है कि जब बड़ी संख्या में पद खाली हैं और योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं, तो भर्ती प्रक्रिया को गति क्यों नहीं दी जा रही?

यह सवाल केवल नौकरी का नहीं, बल्कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता से भी जुड़ा है.

 रात में धरना स्थल खाली कराने का मुद्दा भी गरमाया

प्रदर्शन के दौरान रात में धरना स्थल खाली कराए जाने को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली. आंदोलनकारी इसे अपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं.

उनका कहना है कि यदि सरकार को उनकी मांगों पर आपत्ति है तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए. उनका सवाल है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ प्रशासन का रवैया ऐसा क्यों होना चाहिए?

हालांकि धरना स्थल पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सामने आए सभी दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है. इसलिए इस हिस्से को आंदोलनकारियों के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.

TGT-PGT अभ्यर्थियों का आंदोलन भी जारी

प्रयागराज में शिक्षक भर्ती का आंदोलन केवल प्राथमिक शिक्षकों तक सीमित नहीं है। TGT-PGT भर्ती को लेकर भी अभ्यर्थी पत्थर गिरजाघर पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

युवा मंच की ओर से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं इंटर कॉलेजों में रिक्त शिक्षक पदों पर पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग की जा रही है. सितंबर के पहले सप्ताह में इस आंदोलन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के आमरण अनशन पर बैठने की भी खबर सामने आई थी. 9 सितंबर तक TGT-PGT अभ्यर्थियों का आंदोलन दसवें दिन भी जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई थी. इस तरह प्रयागराज इस समय उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती से जुड़े अलग-अलग वर्गों के आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

शिक्षक भर्ती को लेकर चल रहे आंदोलन ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा है.

उन्होंने छात्रों से समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर समस्याओं का समाधान किया जाएगा. रात में छात्रों के प्रदर्शन को समाप्त कराने के तरीके को लेकर उन्होंने सरकार को ‘अन-डेमोक्रेटिक’ बताया.

अखिलेश के बयान के बाद शिक्षक भर्ती का मुद्दा राजनीतिक बहस में भी और प्रमुख हो गया है. फिलहाल सत्ता पक्ष की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

क्या है सरकार के सामने असली चुनौती?

यहां एक अहम सवाल यह है कि अगर 60 हजार से ज्यादा सहायक अध्यापक पद रिक्त हैं, तो भर्ती प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है?

सरकार की तरफ से रिक्त पदों के संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाने के संकेत जरूर मिले हैं. ई-अधियाचन पोर्टल पर जिलों से रिक्तियों का विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी और 11,508 नगर क्षेत्र के पदों का अधियाचन भी आयोग को भेजा गया. लेकिन अभ्यर्थियों की मांग इससे कहीं बड़ी है. वे चाहते हैं कि प्रदेश में उपलब्ध सभी वास्तविक रिक्तियों का पारदर्शी आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए और उसके आधार पर समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए.

‘1.40 लाख पद खाली’ के दावे पर क्या है स्थिति?

शिक्षक भर्ती आंदोलन के बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में यूपी में 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली होने का दावा भी किया जा रहा है लेकिन उपलब्ध आधिकारिक केंद्रीय रिकॉर्ड में इस संख्या की यूपी-विशेष पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं मिलती.

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2026 में राज्यसभा में स्पष्ट किया था कि शिक्षक भर्ती, सेवा शर्तें और नियुक्ति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आती हैं. केंद्र सरकार राज्यों को रिक्त पदों को पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रक्रिया से भरने की सलाह देती है.

इसलिए वर्तमान में सबसे ठोस यूपी-विशेष आंकड़ा विधानसभा में सामने आया 60,958 रिक्त सहायक अध्यापक पदों का है.

अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें

प्रयागराज में हजारों अभ्यर्थियों का धरना यह संकेत दे रहा है कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब केवल रोजगार की मांग नहीं रह गया है. यह युवाओं के लंबे इंतजार, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है.

अभ्यर्थियों की मांग साफ है—रिक्तियों का स्पष्ट आंकड़ा जारी हो, 60 हजार के आसपास प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन निकले और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए.

अब देखना यह है कि सरकार आंदोलन के दबाव के बीच कोई ठोस भर्ती कैलेंडर जारी करती है या फिर प्रयागराज का पत्थर गिरजाघर आने वाले दिनों में शिक्षक भर्ती आंदोलन का और बड़ा केंद्र बनता है.

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