TMC crisis: कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC के बागी MLA रीताब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता देने के असेंबली स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया. यह फैसला ममता बनर्जी गुट के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने इस रोल के लिए सोभनदेब चट्टोपाध्याय को नॉमिनेट किया था.
“अंतरिम राहत के लिए कोई अर्ज़ी नहीं बनती”-कोर्ट
कोलकाता हाईकोर्ट में तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए अर्जी दायर की थी. इसी अर्जी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिटीशनर की अंतरिम प्रोटेक्टिव ऑर्डर की रिक्वेस्ट को मना कर दिया, जिससे स्पीकर की रीताब्रत बनर्जी को मान्यता देने की इजाज़त मिल गई. कोर्ट ने कहा कि “अंतरिम राहत के लिए कोई अर्ज़ी नहीं बनती”.
TMC crisis: पार्टी में बन गए हैं दो गुट
यह स्थिति पार्टी के अंदर पहले कभी न हुए पॉलिटिकल विद्रोह से पैदा हुई है. रीताब्रत बनर्जी ने 80 चुने हुए MLAs में से 59 के सपोर्ट का दावा किया, जो एक अलग लेजिस्लेटिव ब्लॉक बनाने के लिए ज़रूरी दो-तिहाई की लिमिट को पार कर गया.
अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए तय
कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए तय की है और सभी संबंधित पार्टियों को आने वाले हफ़्तों में अपने एफिडेविट जमा करने का निर्देश दिया है.

