Special Parliament Session: डिमिलिटेशन बिल पर प्रियंका गांधी के हमले के बाद अमित शाह ने दी सफाई

Special Parliament Session: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर लोकसभा में हो रही बहस में प्रियंका गांधी के भाषण के बाद खड़े होकर कहा कि वह शुक्रवार को अपने भाषण में विपक्ष के सारे सवालों के जवाब देंगे. लेकिन फिलहाल वह कुछ भ्रांतियों पर सफाई देना चाहते हैं.

अमित शाह ने डिमिलिटेशन बिल पर स्पष्टीकरण दिया

प्रियंका गांधी के भाषण के बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने इस बात पर स्पष्टीकरण दिया कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने के बाद हर राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी. उन्होंने कहा, “आंध्र प्रदेश की 25 सीटें हैं, अब की स्थिति में उनका प्रतिशत प्रतिनिधित्व 4.60% है इसमें भी लगभग 50% वृद्धि होगी और सीटें हो जाएंगी 38… तेलंगाना में अभी 17 सीटें हैं और उनकी शक्ति 3.13% है, वृद्धि के बाद 26 सीटें हो जाएगी और 3.18% उनकी क्षमता हो जाएगी. मैं तमिलनाडु की जनता को भी आश्वस्त करता हूं कि आपकी शक्ति कम नहीं होगी बल्कि बढ़ेगी. अभी 49 सांसद तमिलनाडु से चुनकर आते हैं और उनकी क्षमता 7.18% है, वृद्धि के बाद सांसद 59 हो जाएंगे और नए सदन में क्षमता 7.23% हो जाएगी। तमिलनाडु को भी कोई नुकसान नहीं होगा. कुल मिलाकर दक्षिण का जो पूरा नैरेटिव बनाया जा रहा है, अभी 543 सीटों में उनके 129 सांसद बैठते हैं, 23.76% दक्षिण सांसदों की शक्ति यहां है, 50% वृद्धि के बाद 129 की जगह 195 सांसद दक्षिण के होंगे और उनकी शक्ति 23.97% होगी.”

Special Parliament Session: अमित शाह का ‘आपातकाल’ की याद दिलाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जहां तक लोकतंत्र को खत्म करने की बात है, मैं भाजपा कार्यकर्ता के नाते, इस सदन में एक सांसद के नाते कहता हूं कि किसी की भी इस देश से लोकतंत्र को खत्म करने की ताकत नहीं है. जिन्होंने आपातकाल के वक्त प्रयास किए हैं, जनता ने उन्हें खत्म कर दिया, लोकतंत्र को कुछ नहीं हुआ. लोकतंत्र इस तरह खत्म नहीं होता.”

‘2029 से पहले परिसीमन लागू होने का कोई सवाल ही नहीं’ -अमित शाह

अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि, “यह बात कही जा रही है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव हो रहे हैं और ऐसे समय में एक नया कानून लाया गया है. यह बात सही नहीं है. मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूँ कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट तभी लागू होगी, जब उसे संसद स्वीकार कर लेगी और राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल जाएगी. इसलिए, 2029 से पहले इसके लागू होने का कोई सवाल ही नहीं है. 2029 तक होने वाले चुनाव भी मौजूदा व्यवस्था और मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के तहत ही कराए जाएँगे. इसलिए, अखिलेश जी (यादव) को चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है.”

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