इस विधेयक में ‘राजनीति की बू’ घुली हुई है- प्रियंका गांधी, पीएम मोदी की गारंटी पर बोली कांग्रेस, ’आपने तो 15 लाख देने भी वादा किया था”

गुरुवार को महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल पर हो रही स्पेशल सेशन की डिबेट में कांग्रेस Congress नेता केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभाला. एक तरफ जहां केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री मोदी के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम ने तो काला धन लाने और 15 लाख देने का भी वादा किया था. वहीं प्रियंका गांधी ने डिलिमिटेशन को जनगणना से पहले कराने को लेकर उनकी नियत पर शक जाहिर किया. उन्होंने कहा अगर नियत साफ है तो मौजूदा 545 सदस्यों में ही महिला आरक्षण लागू करें हम साथ देंगे.

प्रियंका गांधी का PM मोदी पर तंज- ‘अगर आप सच में महिलाओं का सम्मान करते’

प्रियंका गांधी ने कहा, “मैं PM मोदी से कहना चाहती हूँ कि अगर वे यह ऐतिहासिक कदम ईमानदारी से उठा रहे होते, तो पूरी संसद ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया होता.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर PM मोदी सच में महिलाओं का सम्मान करते, तो वे उनका इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदे के लिए नहीं करते. यह आपके पद और आपके कर्तव्य के ख़िलाफ़ है.”

बीजेपी ने किया था पंचायतों में महिला आरक्षण का विरोध-प्रियंका गांधी

हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था में महिला आरक्षण लागू करना एक अनोखा कदम था. पंचायतों और नगर पालिकाओं में भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान कांग्रेस की सरकार ने स्व. राजीव गांधी जी के नेतृत्व में सदन के पटल पर पेश किया था. लेकिन उस समय ये प्रावधान पारित नहीं हो पाया. आज प्रधानमंत्री जी ने भी इसका जिक्र किया लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने आधी बात ही बताई. प्रधानमंत्री जी ने बताया कि उस समय इस प्रावधान का विरोध हुआ, लेकिन ये नहीं बताया कि किसने विरोध किया. सच्चाई ये है कि तब BJP ने ही इस विधेयक का विरोध किया था. कुछ साल बाद स्व. पी.वी नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने इस कानून को सदन में पारित कर लागू किया. आज इस कानून के चलते ही 40 लाख पंचायत प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हमारे लोकतंत्र में भागीदार हैं.

हमने पहली महिला प्रधानमंत्री दी- Congress

हमने, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने, इस देश को इसकी पहली महिला प्रधानमंत्री, श्रीमती इंदिरा गांधी जी दीं. वह प्रधानमंत्री हमारी मौजूदा प्रधानमंत्री जैसी नहीं थीं. उन्होंने कभी इस तरह सरेंडर नहीं किया. वह एक बहादुर प्रधानमंत्री थीं। हमें इंदिरा गांधी जी पर बहुत गर्व है. हमने पहली महिला राष्ट्रपति और संसद की स्पीकर दी.

‘One Vote, One Citizen, One Value’ का सिद्धांत कांग्रेस की देन- प्रियंका गांधी

वहीं प्रियंका गांधी ने ‘One Vote, One Citizen, One Value’ का सिद्धांत को लेकर कहा, मोतीलाल नेहरू जी ने साल 1928 में एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे उन्होंने कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति को सौंपा था. मोतीलाल नेहरू जी एक समिति के अध्यक्ष थे और तब उन्होंने 19 मूल अधिकारों की सूची बनाई थी. 1931 में सरदार पटेल जी की अध्यक्षता में कराची अधिवेशन हुआ था, जिसमें इस प्रस्ताव को पारित किया गया. यहीं से भारत की राजनीति में महिलाओं के समान अधिकार की बात शामिल हुई. उसी समय ‘One Vote, One Citizen, One Value’ का सिद्धांत हमारी राजनीति में लागू हुआ. इस सिद्धांत की वजह से हमारे देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आजादी के पहले दिन से ही मिल गया. जबकि अमेरिका जैसे देश में महिलाओं को इस अधिकार के लिए 150 साल इंतजार करना पड़ा था.

इस विधेयक में ‘राजनीति की बू’ घुली हुई है- प्रियंका गांधी

अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने कहा, आज की चर्चा महिला आरक्षण पर नहीं है. मोदी सरकार ने जो विधेयक पेश किया है, उसे पढ़कर पूरी चर्चा ही बदल गई है. सरकार द्वारा जारी विधेयक में लिखा है-
⦿ संसद में महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए
⦿ महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा सदस्यों की संख्या 50% तक बढ़ानी होगी
⦿ इन सीटों को बढ़ाने के लिए एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो 2011 की जनगणना को आधार बनाकर कार्य करेगा कहा जा सकता है कि इस विधेयक में ‘राजनीति की बू’ घुली हुई है. 2023 में पारित विधेयक में साफ लिखा था कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन करवाया जाएगा. लेकिन अब क्या सरकार का मन बदल गया? मोदी सरकार पुराने आंकड़ों के आधार पर आगे क्यों बढ़ना चाह रही है? प्रतिनिधित्व का सवाल जनसंख्या के सवाल से जुड़ा हुआ है. जब तक जातिगत जनगणना नहीं हो जाती, सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता. मोदी सरकार 2011 की जनगणना पर इसलिए आगे बढ़ना चाहती है, क्योंकि इसमें OBC वर्ग की संख्या ही नहीं है.
इस सदन ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था. अगर सरकार सचमुच गंभीर होती, तो वह इसे 2024 में ही लागू कर सकती थी. इसके बजाय, वह इस मुद्दे का इस्तेमाल सिर्फ़ राजनीतिक दिखावे के लिए कर रही है.

मोदी OBC वर्ग का हक छीनना चाह रहे हैं-प्रियंका गांधी

आज प्रधानमंत्री ने बड़े हल्के में बोल दिया कि हम ‘इस वर्ग-उस वर्ग’ को देख लेंगे. आखिर ये ‘इस वर्ग-उस वर्ग’ क्या है? क्या वो OBC वर्ग की बात कर रहे थे कि हम इस वर्ग को बाद में देख लेंगे. हमें इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. OBC वर्ग की बहुत बड़ी संख्या है, उनका एक बड़ा संघर्ष है. हम इनके हक की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे टेक्निकल मुद्दा बता दिया. क्या प्रधानमंत्री जातिगत जनगणना से घबरा रहे हैं कि जब असल आंकड़ें आएंगे तो पता चलेगा कि OBC वर्ग कितना बड़ा और कितना मजबूत है, तब कोई नकार नहीं पाएगा. 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC वर्ग का हक छीनना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा कभी नहीं होने देगी.

कांग्रेस ने साफ पूछा अगर सरकार की नियत में खोट नहीं है तो फिर सभी राज्यों की सीटें 50 प्रतिशत बढ़ेंगी ऐसा विधेयक में क्यों नहीं लिखा गया.

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