‘सिर्फ़ आंदोलन लाठीचार्ज को सही नहीं ठहरा सकता’, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर CJP मार्च पर हुई कार्रवाई पर बोला SC

SC on CJP protest: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इशारा किया कि वह विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए देश भर में गाइडलाइंस बना सकता है. कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, लेकिन प्रदर्शनकारियों की हिंसा और पुलिस का ज़्यादा बल प्रयोग भी मंज़ूर नहीं है.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि वह प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसवालों को लगी चोटों को लेकर बराबर चिंतित है, और इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रदर्शनकारियों और पुलिसवालों का “खुद से लगाया गया अनुशासन” एक काम करने वाले लोकतंत्र का ज़रूरी हिस्सा है.

यह बात तब आई जब कथित परीक्षा पेपर लीक को लेकर देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कई याचिकाओं का ज़िक्र बेंच के सामने किया गया, जिसमें 20 जुलाई के “संसद चलो” मार्च के दौरान पुलिस की ज़्यादती और बिहार में उसके बाद की घटनाओं के आरोप भी शामिल हैं, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना भी शामिल थे.

यह मामला इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि यह कुछ दिनों पहले ही देश भर में हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और केंद्र के संसद में एक सख़्त एंटी-पेपर लीक कानून लाने के कदम के कुछ दिनों बाद आया है.

SC on CJP protest: ‘बिहार में AK-47 का इस्तेमाल’

एक पिटीशन का ज़िक्र करते हुए, राज्यसभा MP मनोज झा की तरफ से पेश वकील फौज़िया शकील ने कोर्ट को बताया कि बिहार के सीवान ज़िले में प्रोटेस्टर्स पर फायरिंग समेत पुलिस एक्शन से जुड़ी चीज़ों को रिकॉर्ड में रखने के लिए एक पूरी रिट पिटीशन फाइल की गई है.
शकील ने कहा, “हमने बिहार फायरिंग समेत पूरी जानकारी के साथ एक रिट पिटीशन फाइल की है…सीवान में AK-47 का इस्तेमाल हुआ था…हमने डेटा फाइल किया है.”
एक और वकील ने रिक्वेस्ट की कि प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर मारपीट का शिकार हुए स्टूडेंट्स के परिवारों की तरफ से फाइल की गई कई पिटीशन और एप्लीकेशन पर एक साथ सुनवाई की जाए.

प्रदर्शनों पर गाइडलाइन बनाने पर विचार कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

जवाब देते हुए, चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट पहले से ही प्रोटेस्ट पर पूरे देश में गाइडलाइंस की मांग करने वाली एक पिटीशन पर विचार कर रहा है.
CJI ने कहा, “एक पिटीशन है जिसमें प्रोटेस्ट वगैरह के लिए पूरे देश में गाइडलाइंस की मांग की गई है. संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का अधिकार दिया गया है. जब तक शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट होता है, तब तक इसकी इजाज़त है.” यह बात तब कही गई जब पिटीशनर-एडवोकेट शैलेश मणि त्रिपाठी की ओर से पेश सीनियर वकील शंकरनारायणन ने कहा कि उनकी पिटीशन में ऐसी गाइडलाइंस की मांग की गई है.
जस्टिस बागची ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोर्ट की चिंता कानून लागू करने वाले लोगों के लिए भी उतनी ही है.
जस्टिस बागची ने कहा, “सभी लोगों को चोट लगना, चाहे वे पुलिसवाले हों या कोई और, हमारे लिए बराबर चिंता का विषय है. हम राज्य से यह बताने के लिए कह सकते हैं कि पुलिसवालों को ज़रूरी सेफ्टी गियर और गार्ड, हेलमेट वगैरह क्यों नहीं दिए गए.”
चीफ जस्टिस ने अपनी तरफ से कहा कि एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल ज़रूरी लग रहा है.
उन्होंने कहा, “एक प्रोटोकॉल होना चाहिए. हर किसी को विरोध करने का अधिकार है, जब तक कि यह सही इजाज़त के साथ और तय जगहों पर हो. लेकिन अगर कुछ एंटी-सोशल एलिमेंट्स ने कुछ किया है, तो उस पर भी गौर किया जा सकता है.”
सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कोर्ट से एक जैसे नियम बनाने की अपील की. सिंह ने कहा, “पूरे देश में गाइडलाइंस और किसी तरह का बैलेंस होना चाहिए.”

विरोध और लाठीचार्ज पर क्या बोला कोर्ट

इस बात पर सहमत होते हुए कि यह मुद्दा किसी एक राज्य से आगे है, CJI ने कहा कि सभी पिटीशन पर एक साथ सुनवाई होगी.
“हम सभी मामलों को कल लिस्ट करेंगे. इसे बुरा न मानें. अगर कोई ज्यादती हुई है, तो उसे बिना किसी भेदभाव के देखा जा सकता है…किसने किया है वगैरह…यह सिर्फ दिल्ली का सवाल नहीं है बल्कि यह पूरे देश का मुद्दा है. ऐसा नहीं हो सकता कि कोई आंदोलन हो और इसलिए लाठीचार्ज हो. यह भी नहीं हो सकता कि इन विरोध प्रदर्शनों में हिंसा हो,” जस्टिस कांत ने कहा.
चीफ जस्टिस ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “विरोध प्रदर्शनों के दौरान खुद पर लगाया गया अनुशासन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ज़रूरी हिस्सा है.”
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस को सभी पिटीशन पर एक साथ सुनवाई करने पर कोई एतराज़ नहीं है. मेहता ने कहा, “हम इसे बुरा नहीं मान रहे हैं. सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए.”
इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया कि सभी पेंडिंग पिटीशन को मंगलवार को एक साथ लिस्ट किया जाए.

24 जुलाई को भी हुई थी दो मामलों में सुनवाई

यह सुनवाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के “संसद चलो” मार्च पर 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहे केस के बैकग्राउंड में हो रही है, जिसमें सुरक्षाकर्मियों पर बहुत ज़्यादा बल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था.
24 जुलाई को, सुप्रीम कोर्ट दो नई शुरू की गई पिटीशन पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया, जब CJI ने साफ़ किया कि ऐसी रिपोर्टें गलत थीं जिनमें कहा गया था कि कोर्ट ने पहले मामले की सुनवाई करने से मना कर दिया था, क्योंकि तब कोई रिट पिटीशन फाइल नहीं की गई थी. अलग से, दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों को कार्रवाई को चुनौती देने वाली बातों की जांच करते समय पुलिस कार्रवाई से जुड़े CCTV फुटेज, वीडियोग्राफी और दूसरे रिकॉर्ड संभालकर रखने का निर्देश दिया है.
नई पिटीशन बिहार में बाद की घटनाओं पर भी आधारित हैं, जहां दिल्ली आंदोलन के साथ एकजुटता में विरोध प्रदर्शन फैल गए. कोर्ट के सामने रखी गई जानकारी के मुताबिक, शनिवार को सीवान में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल हो गए. पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के पत्थरबाजी के बाद फायरिंग हुई जिसमें कई लोग भी घायल हो गए. इसी तरह की हिंसा की खबर पहले जहानाबाद में भी आई थी.
शनिवार को प्रधान के इस्तीफे के बाद, CJP ने घोषणा की कि वह अपना देशव्यापी आंदोलन वापस ले रहा है, यह बताते हुए कि केंद्र ने उसकी मुख्य मांगें मान ली हैं.

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