सहरसा में मिड-डे मील खाने से बच्चे बीमार,अस्पताल में पत्रकार से मारपीट का आरोप

Saharsa Mid Day Meal सहरसा: बिहार के सहरसा जिले में मिड-डे मील को लेकर एक बड़ी घटना सामने आई है. इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और अस्पतालों में मीडिया की स्वतंत्र रिपोर्टिंग, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.महिषी प्रखंड के मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई. बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. इस घटना की रिपोर्टिंग करने पहुंचे प्रभात खबर डिजिटल के एक पत्रकार के साथ अस्पताल में कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला भी सामने आया है.

बताया जा रहा है कि पत्रकार बच्चों के बीमार पड़ने की घटना की जानकारी जुटाने और अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति जानने के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और पत्रकार के बीच विवाद हुआ. आरोप है कि पत्रकार को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर बंद कर दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई.

हालांकि, पत्रकार से मारपीट के आरोपों और घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है. ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल में वास्तव में क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

Saharsa Mid Day Meal:मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की बिगड़ी तबीयत

सहरसा के महिषी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के कुछ समय बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. कई बच्चों ने उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत की. स्थिति बिगड़ने के बाद बच्चों को इलाज के लिए महिषी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. कुछ बच्चों को बाद में सहरसा सदर अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल में कुल 719 बच्चे नामांकित हैं और घटना वाले दिन 543 बच्चे स्कूल पहुंचे थे. इनमें करीब 120 बच्चों ने मिड-डे मील खाया था. भोजन करने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई.

कुछ रिपोर्टों में बच्चों की बीमारी के पीछे भोजन के दूषित होने की आशंका जताई गई है. भोजन में किसी संदिग्ध पदार्थ के मिलने को लेकर भी सवाल उठे हैं. हालांकि, खाने की वास्तविक गुणवत्ता और बच्चों के बीमार पड़ने के कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चे

तबीयत बिगड़ने के बाद बच्चों को तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ बच्चों में उल्टी और कुछ में पेट दर्द की शिकायत अधिक थी. गंभीर स्थिति वाले बच्चों को बेहतर इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेजे जाने की बात सामने आई है.

बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद अभिभावकों में भी चिंता फैल गई. कई अभिभावक अपने बच्चों की स्थिति जानने के लिए अस्पताल पहुंच गए.

पत्रकार से मारपीट का आरोप

बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आने के बाद मीडिया कर्मी भी मामले की जानकारी जुटाने अस्पताल पहुंचे. इसी दौरान प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार के साथ कथित मारपीट का आरोप सामने आया है.

आरोप है कि पत्रकार अस्पताल में बच्चों के इलाज और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रहे थे. इसी दौरान अस्पताल के कुछ डॉक्टरों/कर्मियों के साथ उनकी कहासुनी हुई. इसके बाद पत्रकार को कथित तौर पर ऑपरेशन थिएटर के अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई.

इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों में भारी नाराजगी है. मारपीट के आरोप आरोप सही पाए जाते हैं तो अस्पताल परिसर में पत्रकार के साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर मामला माना जाएगा. वहीं, डॉक्टरों या अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर स्पष्ट होगी.

मिड-डे मील की गुणवत्ता पर फिर सवाल

सहरसा की यह घटना सरकारी स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है.

बलुआहा स्कूल में मिड-डे मील की आपूर्ति एक एनजीओ के माध्यम से होने की जानकारी सामने आई है. घटना के बाद भोजन की गुणवत्ता, उसकी तैयारी, परिवहन और बच्चों को परोसने से पहले की जांच व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि भोजन में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

जांच रिपोर्ट से साफ होगा बीमारी का कारण

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चों की तबीयत आखिर किस वजह से बिगड़ी. क्या भोजन वास्तव में दूषित था या किसी अन्य वजह से बच्चों को परेशानी हुई? इसका जवाब जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही मिल सकेगा.

प्रशासन की ओर से भोजन के नमूने की जांच और पूरे मामले की जांच की बात सामने आई है. जांच में भोजन की गुणवत्ता, उसे तैयार करने की प्रक्रिया और स्कूल तक पहुंचने के दौरान बरती गई सावधानियों की भी पड़ताल जरूरी होगी.

पत्रकार से कथित मारपीट पर भी जांच जरूरी

बच्चों के इलाज की खबर जुटाने गए पत्रकार के साथ हुई कथित मारपीट का मामला भी जांच के दायरे में आना चाहिए. यदि पत्रकार को वास्तव में ऑपरेशन थिएटर में बंद कर उनके साथ मारपीट की गई है तो घटना की सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ के जरिए सच्चाई सामने लाई जा सकती है.

फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पहलू सामने हैं—पहला, मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों का बीमार पड़ना और दूसरा, अस्पताल में रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकार के साथ कथित मारपीट. दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी.

Latest news

Related news