रांची का 96 साल पुराना विश्वकर्मा मंदिर, जहां आज भी कायम है आस्था, जानिए पूजा का पूरा कार्यक्रम

Ranchi Vishwakarma Temple : झारखंड की राजधानी रांची के मेन रोड स्थित विश्वकर्मा लेन का श्री जगतगुरु विश्वकर्मा मंदिर विश्वकर्मा पूजा के लिए पूरी तरह तैयार है.करीब नौ दशक से अधिक समय से भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना का केंद्र बना यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के जिलों से आने वाले भक्तों के लिए भी विशेष धार्मिक महत्व रखता है. विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजन, हवन, महाआरती और महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा.

मंदिर में वर्ष 1930 से भगवान विश्वकर्मा की पूजा होने की जाती रही है.धार्मिक परंपरा और वर्षों से चली आ रही पूजा-अर्चना के कारण यह स्थल रांची के प्रमुख विश्वकर्मा पूजा केंद्रों में शामिल है.

Ranchi Vishwakarma Temple:मोनी बाबा ने शुरु कराई थी पूजा 

श्री जगतगुरु विश्वकर्मा मंदिर के इतिहास के अनुसार, वर्ष 1928 में संत मोनी बाबा ने भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर स्थापित कर पूजा-अर्चना की शुरुआत की थी. इसके बाद वर्ष 1930 से मंदिर में नियमित रूप से भगवान विश्वकर्मा की पूजा किए जाने की परंपरा आगे बढ़ी.

समय के साथ यह धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया. रांची के अलावा आसपास के जिलों से भी लोग यहां भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद लेने और विशेष पूजा में शामिल होने पहुंचते हैं.

मंदिर की पुरानी धार्मिक परंपरा इसे विश्वकर्मा पूजा के दौरान विशेष पहचान दिलाती है. हर वर्ष पूजा के अवसर पर भक्तों की भागीदारी और धार्मिक आयोजन मंदिर के वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं.

सुबह 11 बजे शुरू होगा भगवान विश्वकर्मा का पूजन

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मंदिर में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11 बजे विधिवत पूजन शुरू किया जाएगा. भगवान विश्वकर्मा की पूजा मुख्य पुजारी राजाराम शास्त्री द्वारा कराई जाएगी.

पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा से सुख-समृद्धि, कार्यक्षेत्र में सफलता और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे. विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से निर्माण, शिल्प, तकनीक, औजारों और विभिन्न प्रकार के कार्यों से जुड़े लोगों के लिए धार्मिक महत्व रखती है.

मंदिर प्रबंधन की ओर से पूजा कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की गई है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन के विभिन्न चरणों की रूपरेखा तय की गई है.

दोपहर 1 बजे हवन और महाआरती

सुबह के पूजन के बाद दोपहर 1 बजे हवन और महाआरती का आयोजन किया जाएगा.धार्मिक अनुष्ठान के इस चरण में श्रद्धालुओं की भागीदारी रहेगी.

हवन के बाद महाआरती के दौरान भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाएगी.मंदिर परिसर में होने वाला यह कार्यक्रम विश्वकर्मा पूजा के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होगा.

श्रद्धालुओं के लिए हवन और महाआरती में शामिल होने का अवसर विशेष महत्व रखता है. मंदिर की परंपरा के अनुसार धार्मिक विधियों के साथ पूजा संपन्न कराई जाएगी.

दोपहर 3 बजे प्रसाद वितरण और महाभंडारा

पूजा और महाआरती के बाद दोपहर 3 बजे प्रसाद वितरण एवं महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा.

महाभंडारा धार्मिक आयोजनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां भक्तों और आगंतुकों को सामूहिक रूप से भोजन कराया जाता है. विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आयोजित होने वाला यह भंडारा श्रद्धालुओं के बीच आपसी सहभागिता और धार्मिक जुड़ाव का माध्यम बनेगा. मंदिर में आने वाले भक्त पूजा कार्यक्रम के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे.

आयोजन को सफल बनाने में इन लोगों की भूमिका

श्री जगतगुरु विश्वकर्मा मंदिर में विश्वकर्मा पूजा के आयोजन को सफल बनाने के लिए कई लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. आयोजन से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • रामरतन शर्मा

  • शंकर विश्वकर्मा

  • जयप्रकाश शर्मा

  • रामजतन शर्मा

  • मनबोध शर्मा

  • विभीषण शर्मा

  • परमेश्वर शर्मा

  • राजकुमार शर्मा

इन लोगों के सहयोग से पूजा, हवन, महाआरती और महाभंडारे की व्यवस्थाओं को संचालित किया जाएगा.

रांची में विश्वकर्मा पूजा को लेकर उत्साह

विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित प्रमुख धार्मिक पर्व है. इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्षेत्रों, प्रतिष्ठानों और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं.

रांची के श्री जगतगुरु विश्वकर्मा मंदिर में लंबे समय से चली आ रही पूजा परंपरा इस आयोजन को विशेष महत्व देती है. वर्ष 1930 से पूजा होने के कारण मंदिर का धार्मिक इतिहास कई पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है.

इस बार भी मंदिर में विशेष पूजन, हवन, महाआरती और महाभंडारे के माध्यम से विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाएगा. श्रद्धालुओं के लिए यह दिन धार्मिक आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अवसर होगा.

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