‘कोर्ट जाओ’, नॉर्वे में PM मोदी के मीडिया के सवाल नहीं लेने को लेकर घिरा MEA, विदेशी पत्रकारों के साथ हुई गरमा-गरम बहस

PM Modi Norway Visit: देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने को लेकर अकसर सवालों के घेरे में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब विदेशों में भी पत्रकारों के सवालों से बचने का आरोप लगने लगा है. पीएम के सवाल नहीं लेने को लेकर और ह्यूमन राइट्स पर सवालों के जवाबों का सही और सीधा जवाब नहीं देने पर विदेश मंत्रालय (MEA) को भी आलोचना और बहस का सामना करना पड़ा. मामला इतना गरमा गया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विदेशी मीडिया पर भारत के मीडिया इकोसिस्टम की नहीं समझने और “अज्ञानी NGOs” की पब्लिश की गई कुछ रिपोर्ट्स पढ़ सवाल पूछने का आरोप लगा दिया..

नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट में क्या हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोप दौरे के दौरान सोमवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ उनके जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान पीएम मोदी के मीडिया के सवाल नहीं लेने को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. दोनों देशों के प्रधानमंत्री की जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के बाद हुई विदेश मंत्रालय (MEA) की ब्रीफिंग में पत्रकारों ने इसको लेकर अपनी आपत्ति जताई. पत्रकारों ने अधिकारियों पर दबाव डाला और पूछा कि PM “दुनिया के सबसे आज़ाद प्रेस” के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं.
PM मोदी अभी अपने पांच देशों के दौरे के चौथे हिस्से के लिए नॉर्वे में हैं और 19 मई को इटली जाने वाले हैं. वे यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड्स और स्वीडन घूमने के बाद ओस्लो पहुंचे थे.

PM Modi Norway Visit: सीधे सवाल नहीं लेने पर पीएम मोदी की नोर्वे में हुई आलोचना

नॉर्वे के एक अखबार की कमेंटेटर हेले लिंग ने X पर PM मोदी का जॉइंट स्टेटमेंट वेन्यू से बाहर निकलते हुए एक वीडियो शेयर किया और कैप्शन में कहा कि PM मोदी ने उनका सवाल नहीं लिया. उन्होंने पोस्ट में कहा, “भारत के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी, मेरा सवाल नहीं लेंगे, मुझे उनसे इसकी उम्मीद नहीं थी,” उन्होंने वीडियो शेयर किया जिसमें एक महिला को ज़ोर से यह कहते हुए सुना जा सकता है, “आप दुनिया के सबसे आज़ाद प्रेस से कुछ सवाल क्यों नहीं लेते”.

पत्रकार ने वीडियो के साथ लिखा, “वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले नंबर पर है, भारत 157वें नंबर पर है, जिसका मुकाबला फिलिस्तीन, अमीरात और क्यूबा से है. जिन ताकतों के साथ हम सहयोग करते हैं, उनसे सवाल करना हमारा काम है.”

MEA प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई गरमा-गरम बहस

PM मोदी के प्रेस ब्रीफिंग के बाद आई पत्रकार की पोस्ट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही है. इस बीच MEA की प्रेस ब्रिफिंग में भी पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं देने को लेकर काफी हंगामा हुआ. यहां, भारतीय अधिकारियों की “भरोसे” और “ह्यूमन राइट्स” जैसे सवालों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली वहीं विदेशी पत्रकारों ने अधिकारियों पर सवालों से बचने का आरोप लगाया.
नॉर्वे के उसी पत्रकार ने जिसने PM मोदी का वीडियो पोस्ट किया था, पूछा, “हमें आप पर भरोसा क्यों करना चाहिए,” और कहा कि “क्या आप वादा कर सकते हैं कि आप अपने देश में हो रहे ह्यूमन राइट्स वायलेशन को रोकेंगे”.
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री “इंडियन प्रेस से ज़रूरी सवाल लेना शुरू करेंगे?”
इसके जवाब में, MEA सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने सीधा जवाब देने के बजाए ये बताया की “इंडिया क्या है”
मैं आपको बताता हूँ कि इंडिया क्या है… एक देश क्या है? आज एक देश के चार एलिमेंट होते हैं. एक, पॉपुलेशन, दो गवर्नमेंट, तीसरा सॉवरेनिटी, और चौथा टेरिटरी. तो, यही एक देश को देश बनाता है. और हमें गर्व है… कि हम 5,000 साल पुराने एक सिविलाइज़ेशनल देश हैं. लगातार सिविलाइज़ेशन, लगातार सिविलाइज़ेशन. दुनिया में बहुत बड़ा योगदान दिया है.”

“आपने पूछा कि कोई देश भारत पर भरोसा क्यों करे, मैं उस सवाल का जवाब देता हूँ… भारत एक सभ्य देश है जिसके पास दुनिया को देने के लिए कुछ खास है… पूरी दुनिया कोविड से परेशान हुई… हमने क्या किया? हम गुफा में नहीं छिपे, हमने यह नहीं कहा कि हम दुनिया को नहीं बचाएँगे. हम दुनिया की मदद के लिए आगे आए… इससे भरोसा बनता है, और हमें बहुत खुशी है कि उस भरोसे की कद्र की जा रही है.
जॉर्ज ने ज़ोर देकर G20 और AI समिट जैसे ग्लोबल प्लेटफ़ॉर्म की लिस्ट दी, जहाँ भारत ने ज़रूरी मुद्दे उठाए और भरोसा बनाया, हलांकि जॉर्ज के इस घुमावदार जवाब से असंतुष्ट पत्रकारों ने जब उन्हें टोका तो उनकी पत्रकारों से बहस हो गई. जॉर्ज ने कहा– जिसने सीधे जवाब माँगा – उसे बोलने का मौका देने के लिए.
जॉर्ज ने कहा, “प्लीज़ मुझे जवाब देने दीजिए… ये मेरे अधिकार हैं. आप सवाल पूछें, मुझसे किसी खास तरीके से जवाब देने के लिए मत कहिए.”

PM Modi Norway Visit: ‘कोर्ट जाओ’ MEA ने किसे दी कोर्ट जाने की सलाह

हलांकि इसके बाद सिबी जॉर्ज थोड़े नाराज नज़र आए और उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “हम बहुत से लोगों को पूछते हुए सुनते हैं कि यह क्यों, वह क्यों, लेकिन मैं आपको यह बता दूँ. हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं. हमारे पास एक संविधान है जो लोगों के बुनियादी अधिकारों की गारंटी देता है. हमारे देश की महिलाओं के लिए समान अधिकार हैं, जो बहुत ज़रूरी है.
सिबी जॉर्ज ने फिर कहा कि भारत ने आज़ादी के पहले दिन से ही महिलाओं को बराबरी के अधिकार दिए, जबकि दूसरे कई देशों ने ऐसा नहीं किया. इससे बराबरी और ह्यूमन राइट्स में उसका पक्का यकीन दिखता है.
उन्होंने कहा, “1947 में हमने अपनी महिलाओं को वोट देने की आज़ादी दी. हमने मिलकर आज़ादी हासिल की और पहले दिन से ही वोट देने का अधिकार मिला. मैं कई ऐसे देशों को जानता हूँ जहाँ महिलाओं को वोट देने का अधिकार कई दशकों बाद मिला. हम बराबरी में विश्वास करते हैं; हम ह्यूमन राइट्स में विश्वास करते हैं. अगर किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसे कोर्ट जाने का अधिकार है. हमें एक डेमोक्रेसी होने पर गर्व है.”

MEA ने विदेशी पत्रकारों पर लगाया “अज्ञानी NGOs” की रिपोर्ट पड़ सवाल पूछने का आरोप

सिबी जॉर्ज यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि लोग भारत के मीडिया इकोसिस्टम की बड़ी पहुंच को नहीं समझते हैं और “अज्ञानी NGOs” की पब्लिश की गई कुछ रिपोर्ट्स पढ़ने के बाद बयान देते हैं.
उन्होंने कहा,”आप जानते हैं कि यहां कितनी स्टोरीज़ हैं. हमारे यहां हर दिन शाम को कितनी ब्रेकिंग न्यूज़ आती हैं. अकेले दिल्ली में कम से कम 200 टीवी चैनल, इंग्लिश भाषा में, हिंदी भाषा में और कई भाषाओं में. लोगों को भारत के स्केल की कोई समझ नहीं है. लोगों को कोई समझ नहीं है. वे, आप जानते हैं, कुछ बेवकूफ, अज्ञानी NGOs की पब्लिश की गई एक या दो न्यूज़ रिपोर्ट्स पढ़ते हैं और फिर आकर सवाल पूछते हैं.”
PM मोदी के मीडिया के सवालों का जवाब न देने के एक और सवाल पर, सिबी जॉर्ज ने एक पत्रकार से कहा कि दौरे की ज़िम्मेदारी संभालने वाले देश के तौर पर मीडिया से बात करना उनकी ज़िम्मेदारी है.
जॉर्ज ने कहा, “मैं ऐसा करता रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा.”
इस बीच, नॉर्वे के अखबार के पत्रकार ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि उन्होंने और उनके साथी ने यह सवाल पूछा कि भारत पर भरोसा क्यों किया जाना चाहिए, “मानव अधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए, और दौरे के बारे में भी.”

MEA के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुआ विदेशी मीडिया

उन्होंने कहा, “मैंने कई बार उनसे ह्यूमन राइट्स पर खास बात करने की कोशिश की, लेकिन मैं कामयाब नहीं हुई.” उन्होंने आगे कहा कि रिप्रेजेंटेटिव्स ने कोविड के दौरान भारत की कोशिशों और योग के अलावा दूसरी चीज़ों के बारे में भी बात की.
बाद में एक अलग पोस्ट में, महिला ने साफ़ किया कि वह “जासूस” नहीं है, और कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे यह लिखना पड़ेगा. यह साफ़ नहीं था कि वह किसकी या किस चीज़ की बात कर रही थी.
उन्होंने पोस्ट में कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह लिखना पड़ेगा, लेकिन मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूँ, जिसे किसी विदेशी सरकार ने भेजा हो,” और ज़ोर देकर कहा कि उनका काम जर्नलिज़्म है, “अभी ज़्यादातर नॉर्वे में”.

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